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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1579 of 1855

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Page 1579

जातवेद अग्नि! यह व्यक्ति शरीर से पुनः मिले. (५)
यत्ते कृष्णः शकुन आतुतोद पिपीलः सर्प उत वा श्वापदः.
अग्निष्टद्विश्वादगदं कृणोतु सोमश्च यो ब्राह्मणाँ आविवेश.. (६)
हे मृत व्यक्ति! तुम्हारे जिस अंग को कौवे ने नोचा है अथवा चींटी, सांप या अन्य किसी
पशु ने काटा है, अग्नि उस सबको रोगरहित करें. ब्राह्मणों के शरीर में प्रवेश करने वाले सोम
भी तुम्हें निरोग बनावें. (६)
अग्नेर्वर्म परि गोभिर्व्ययस्व सं प्रोर्णुष्व पीवसा मेदसा च.
नेत्त्वा धृष्णुर्हरसा जर्हृषाणो दधृग्विधक्ष्यन्पर्यङ्खयाते.. (७)
हे प्रेत! तुम गाय के चमड़े के साथ-साथ आग की लपटरूपी कवच को पहनो. तुम चर्बी
और मांस से ढक जाओ. ऐसा होने पर अपने तेज से तुम्हें पराभूत करने वाले एवं अत्यंत
प्रसन्न अग्नि तुम्हें नहीं जलावेंगे. वे तुम्हें विशेष रूप से जलाने को तैयार हैं. (७)
इममग्ने चमसं मा वि जिह्वरः प्रियो देवानामुत सोम्यानाम्.
एष यश्चमसो देवपानस्तस्मिन्देवा अमृता मादयन्ते.. (८)
हे अग्नि! इस चमस को इधर-उधर मत करना. यह सोमरस पीने वाले देवों का प्रिय है.
यह चमस देवों के सोमपान के लिए है. इसे पाकर मरणरहित देव प्रसन्न होते हैं. (८)
क्रव्यादमग्निं प्र हिणोमि दूरं यमराज्ञो गच्छतु रिप्रवाहः.
इहैवायमितरो जातवेदा देवेभ्यो हव्यं वहतु प्रजानन्.. (९)
मैं मांस जलाने वाली तेज आग को दूर करता हूं. पाप को ढोने वाली वह आग यम के
देश में जावे. यहां ही ये दूसरे अग्नि हैं, ऐसा जानते हुए हम देवों के लिए हव्य ले जाते हैं. (९)
यो अग्निः क्रव्यात्प्रविवेश वो गृहमिमं पश्यन्नितरं जातवेदसम्.
तं हरामि पितृयज्ञाय देवं स घर्ममिन्वात्परमे सधस्थे.. (१०)
मांस जलाने वाली चिता की अग्नि तुम्हारे इस घर में प्रवेश कर गई है. मैं उन्हें घर से
निकालता हूं. मैं दूसरे जातवेद अग्नि को देखता हुआ उत्तम स्थान में यज्ञ के लिए प्राप्त करता
हूं. यह अग्नि मेरे यज्ञ को लेकर स्वर्ग में जावें. (१०)
यो अग्निः कव्यवाहनः पितॄन्यक्षदृतावृधः.
प्रेदु हव्यानि वोचति देवेभ्यश्च पितृभ्य आ.. (११)
जो अग्नि श्राद्ध की सामग्री को पितरों तक ढोने वाले, यज्ञ को बढ़ाने वाले एवं
देवपितरों का यज्ञ करने वाले हैं, मैं उन्हीं के पास होम की सामग्री ले जाता हूं. (११)
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