Skip to content
SarvaKosh
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1458 of 1855

Read in context
Page 1458

आ पवस्व सुवीर्यं मन्दमानः स्वायुध. इहो ष्विन्दवा गहि.. (५)
हे शोभन-आयुधों वाले सोम! तुम देवों को प्रसन्न करते हुए हमें शोभन वीर्य वाला पुत्र
दो एवं इस यज्ञ में आओ. (५)
यदद्भिः परिषिच्यसे मृज्यमानो गभस्त्योः. द्रोणा सधस्थमश्रुषे.. (६)
हे सोम! तुम दोनों हाथों से मसले एवं जल से भिगोए जाते हो. तुम द्रोणपात्र में ठहरकर
चमस आदि पात्रों में भरे जाते हो. (६)
प्र सोमाय व्यश्ववत्पवमानाय गायत. महे सहस्रचक्षसे.. (७)
हे स्तोताओ! तुम दशापवित्र से छनते हुए महान् एवं हजारों स्तुतियों वाले सोम की
प्रशंसा में व्यश्व ऋषि के समान गीत गाओ. (७)
यस्य वर्णं मधुश्चतं हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दुमिन्द्राय पीतये.. (८)
हे अध्वर्युगण! तुम शत्रुओं को रोकने वाले, रस टपकाने वाले, हरे रंग से युक्त एवं
दीप्तिशाली सोम को इंद्र के पीने के निमित्त पत्थरों की सहायता से निचोड़ो. (८)
तस्य ते वाजिनो वयं विश्वा धनानि जिग्युषः. सखित्वमा वृणीमहे.. (९)
हे सोम! तुम शक्तिशाली एवं शत्रुओं का धन जीतने वाले हो. हम तुम्हारी मित्रता का
वरण करते हैं. (९)
वृषा पवस्व धारया मरुत्वते च मत्सरः. विश्वा दधान ओजसा.. (१०)
हे अभिलाषापूरक सोम! तुम धारा के रूप में द्रोणकलश तक आओ एवं इंद्र के लिए
प्रसन्नतादायक बनो. तुम अपनी शक्ति से सभी धन स्तोताओं को देते हो. (१०)
तं त्वा धर्तारमोण्यो३ः पवमान स्वर्दृशम्. हिन्वे वाजेषु वाजिनम्.. (११)
हे छनते हुए सोम! तुम द्यावा-पृथिवी के धारणकर्त्ता, सबके द्रष्टा व शक्तिशाली हो. मैं
तुम्हें युद्धों में भेजता हूं. (११)
अया चित्तो विपानया हरिः पवस्व धारया. युजं वाजेषु चोदय.. (१२)
हे मेरी उंगलियों से निचुड़े हुए एवं हरे रंग वाले सोम! तुम द्रोणकलश में जाओ एवं
अपने मित्र इंद्र को संग्रामों में भेजो. (१२)
आ न इन्दो महीमिषं पवस्व विश्वदर्शतः. अस्मभ्यं सोम गातुवित्.. (१३)
हे सर्वद्रष्टा एवं दीप्तिशाली सोम! तुम हमें बहुत सा अन्न दो. हे सोम! हमारे लिए स्वर्ग
ebook converter DEMO Watermarks*