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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1451 of 1855

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Page 1451

सुता अनु स्वमा रजाऽभ्यर्षन्ति बभ्रवः. इन्द्रं गच्छन्त इन्दवः.. (६)
पीले रंग के एवं निचोड़े हुए सोम इंद्र की ओर जाते हुए अपने स्थान को प्राप्त करते हैं.
(६)
अया पवस्व धारया यया सूर्यमरोचयः. हिन्वानो मानुषीरपः.. (७)
हे सोम! तुम उस धारा से नीचे टपको, जिस धारा के द्वारा तुमने मनुष्यों के हितकारक
जलों को प्रेरित करते हुए सूर्य को प्रकाशित किया है. (७)
अयुक्त सूर एतशं पवमानो मनावधि. अन्तरिक्षेण यातवे.. (८)
पवित्र होते हुए सोम मानवों के हित एवं अंतरिक्ष में गति के लिए सूर्य के रथ में घोड़े
जोड़ते हैं. (८)
उत त्या हरितो दश सूरो अयुक्त यातवे. इन्दुरिन्द्र इति ब्रुवन्.. (९)
इंद्र शब्द का उच्चारण करते हुए सोम दशों दिशाओं में जाने के लिए सूर्य के रथ में
एतश नामक घोड़े जोड़ते हैं. (९)
परीतो वायवे सुतं गिर इन्द्राय मत्सरम्. अव्यो वारेषु सिञ्चत.. (१०)
हे स्तोताओ! तुम इंद्र एवं वायु के लिए निचोड़े गए नशीले सोम को इस स्थान से
उठाकर भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर सींचो. (१०)
पवमान विदा रयिमस्मभ्यं सोम दुष्टरम्. यो दूणाशो वनुष्यता.. (११)
हे पवित्र होते हुए सोम! तुम हमें ऐसा धन दो जो हिंसक शत्रु द्वारा नष्ट न हो सके और
शत्रु जिसका पार न पा सके. (११)
अभ्यर्ष सहस्रिणं रयिं गोमन्तमश्विनम्. अभि वाजमुत श्रवः.. (१२)
हे सोम! तुम हमें बहुत संख्या वाला, गायों से युक्त एवं अश्वसहित धन दो तथा हमें बल
और अन्न प्राप्त कराओ. (१२)
सोमो देवो न सूर्योऽद्रिभिः पवते सुतः. दधानः कलशे रसम्.. (१३)
सूर्य के समान तेजस्वी एवं पत्थरों की सहायता से निचोड़े गए सोम अपना रस
द्रोणकलश में धारण करते हुए टपकते हैं. (१३)
एते धामान्यार्या शुक्रा ऋतस्य धारया. वाजं गोमन्तमक्षरन्.. (१४)
ये निचुड़ते हुए एवं उज्ज्वल सोम यजमानों के घरों की ओर गायों से युक्त अन्न देते हुए
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