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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1412 of 1855

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Page 1412

मधोर्धारामनु क्षर तीव्रः सधस्थमासदः. चारुर्ऋताय पीतये.. (८)
हे सोम! तुम मधुर सोम की धाराओं की ओर बहो, तीखे रस वाले बनकर इस निचोड़ने
वाले स्थान पर बैठो एवं यज्ञ में देवों के निमित्त सुंदर पीने के पदार्थ बनो. (८)
सूक्त—१८ देवता—सोम
परि सुवानो गिरिष्टाः पवित्रे सोमो अक्षाः. मदेषु सर्वधा असि.. (१)
ये सोम दशापवित्र पर गिरते हैं एवं निचोड़े जाने के समय पाषाणों पर स्थित रहते हैं. हे
सोम! तुम नशीली वस्तुओं में सर्वोत्तम हो. (१)
त्वं विप्रस्त्वं कविर्मधु प्र जातमन्धसः. मदेषु सर्वधा असि.. (२)
हे विविध प्रकार से प्रसन्न करने वाले एवं मेधावी सोम! तुम अन्न से उत्पन्न मधुर रस दो.
तुम मादक पदार्थों में सर्वश्रेष्ठ हो. (२)
तव विश्वे सजोषसो देवासः पीतिमाशति. मदेषु सर्वधा असि.. (३)
हे सोम! सभी देव समान रूप से प्रसन्न होकर तुम्हें प्राप्त करते हैं. तुम नशीली वस्तुओं
में सबसे उत्तम हो. (३)
आ यो विश्वानि वार्या वसूनि हस्तयोर्दधे. मदेषु सर्वधा असि.. (४)
जो सोम सभी वरण योग्य धनों को स्तोताओं के हाथों में देते हैं, वे सभी नशीली
वस्तुओं में उत्तम हैं. (४)
य इमे रोदसी मही सं मातरेव दोहते. मदेषु सर्वधा असि.. (५)
जिस प्रकार एक बालक दो माताओं का दूध पीता है, उसी प्रकार सोम द्यावा-पृथिवी
दोनों को दुहते हैं. सोम सभी मादक पदार्थों में श्रेष्ठ हैं. (५)
परि यो रोदसी उभे सद्यो वाजेभिरर्षति. मदेषु सर्वधा असि.. (६)
सोम शीघ्र ही अन्नों द्वारा द्यावा-पृथिवी को ढक देते हैं. सोम सभी नशीले पदार्थों के
धारक हैं. (६)
स शुष्मी कलशेष्वा पुनानो अचिक्रदत्. मदेषु सर्वधा असि.. (७)
ये बली सोम शोधित होने के समय कलश के नीचे शब्द करते हैं. (७)
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