ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextकदा न इन्द्र राय आ दशस्येर्विश्वप्स्न्यस्य स्पृहयाय्यस्य राजन्.. (१५)
हे शूर एवं विविध रूपधारी इंद्र! तुम्हारा प्रसिद्ध सत्य मेरी रक्षा करे. हे वज्रधारी इंद्र!
नाविक जिस प्रकार जल से पार करता है, उसी प्रकार तुम हमें महान् पाप से पार करो. हे
राजा इंद्र! तुम विविध रूप वाला एवं अभिलाषा करने योग्य धन हमें कब दोगे? (१५)
सूक्त—८७ देवता—इंद्र
इन्द्राय साम गायत विप्राय बृहते बृहत्. धर्मकृते विपश्चिते पनस्यवे.. (१)
हे उद्गाताओ! मेधावी, महान्, यज्ञकर्मकर्त्ता, विद्वान् एवं स्तोत्रों के अभिलाषी इंद्र को
बृहत् साम गाकर सुनाओ. (१)
त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वं सूर्यमरोचय:. विश्वकर्मा विश्वदेवो मवाँ असि.. (२)
हे इंद्र! तुम शत्रुओं को हराने वाले हो. तुमने सूर्य को तेजस्वी बनाया है. तुम विश्वकर्मा,
विश्वदेव एवं महान् हो. (२)
विभ्राजञ्ज्योतिषा स्वर्अगच्छो रोचनं दिव:. देवास्त इन्द्र सख्याय येमिरे.. (३)
हे इंद्र! तुम अपनी ज्योति द्वारा सूर्य के प्रकाशक बनकर स्वर्ग को दीप्तिशाली बनाने
गए थे. देवों ने तुम्हारी मित्रता के लिए प्रयत्न किया था. (३)
एन्द्र नो गधि प्रिय: सत्राजिदगोह्य:. गिरिनं विश्वतस्पृथु: पतिर्दिव:.. (४)
हे प्रियतम, महान् लोगों को जीतने वाले, किसी के द्वारा न छिपने वाले, पर्वत के समान
चारों ओर विस्तृत एवं स्वर्ग के स्वामी इंद्र! तुम हमारे पास आओ. (४)
अभि हि सत्य सोमपा उभे बभूथ रोदसी. इन्द्रासि सुन्वतो वृध: पतिर्दिव:.. (५)
हे सत्यरूप वाले एवं सोमपानकर्त्ता इंद्र! तुमने द्यावा-पृथिवी को पराजित किया है. तुम
सोमरस निचोड़ने वाले के वर्धक एवं स्वर्ग के स्वामी हो. (५)
त्वं हि शश्वतीनामिन्द्र दर्ता पुरामसि. हन्ता दस्योर्मनोर्वृध: पतिर्दिव:.. (६)
हे इंद्र! तुम शत्रुओं की अनेक नगरियों को तोड़ने वाले हो. तुम दस्युजनों के हंता,
मनुष्यों को बढ़ाने वाले और स्वर्ग के स्वामी हो. (६)
अधा हीन्द्र गिर्वण उप त्वा कामान्मह: ससृज्महे. उदेव यन्त उदभि:.. (७)
हे स्तुति-योग्य इंद्र! जिस प्रकार जलक्रीड़ा करते हुए लोग दूसरों पर जल उछालते हैं,
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