ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअभिलाषाओं से युक्त होकर शीघ्र तुम्हारी स्तुति करें. (९)
सूक्त—७१ देवता—इंद्र
आ प्र द्रव परावतोऽर्वावतश्च वृत्रहन्. मध्वः प्रति प्रभर्मणि.. (१)
हे वृत्रहंता इंद्र! यज्ञ में नशीले सोमरस के प्रति तुम दूर और पास के स्थानों से आओ. (१)
तीव्राः सोमास आ गहि सुतासो मादयिष्णवः पिबा दधृग्यथोचिषे.. (२)
हे इंद्र! तेज नशा करने वाला सोमरस निचोड़ा गया है. तुम हमारे यज्ञ में आओ, सोमरस पिओ एवं उससे प्रसन्न होकर उसकी सेवा करो. (२)
इषा मन्दस्वादु तेऽरं वराय मन्यवे. भुवत्त इन्द्र शं हृदे.. (३)
हे इंद्र! सोमरसरूपी अन्न के द्वारा तुम प्रसन्न बनो. वह तुम में शत्रुनिवारक क्रोध उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त हो. सोम तुम्हारे हृदय में सुख उत्पन्न करे. (३)
आ त्वशत्रवा गहि न्युक्थानि च हूयसे. उपमे रोचने दिवः.. (४)
हे शत्रुरहित इंद्र! शीघ्र आओ. स्तोता उक्थ मंत्रों द्वारा तुम्हें द्युलोक के देवों से दीप्त यज्ञ में बुलाते हैं. (४)
तुभ्यायम्द्रिभिः सुतो गोभिः श्रीतो मदाय कम्. प्र सोम इन्द्र हूयते..(५)
हे इंद्र! तुम्हारे लिए यह सोमरस पत्थरों की सहायता से निचोड़ा गया है एवं गाय का दूध मिलाकर उसे तुम्हारे सुख के लिए यज्ञ में होम किया जा रहा है. (५)
इन्द्र श्रुधि सु मे हवमस्मे सुतस्य गोमतः. वि पीतिं तृप्तिमश्रुहि.. (६)
हे इंद्र! मेरी पुकार सुनो, हमारे द्वारा निचोड़े गए गोदुग्ध मिश्रित सोमरस को पिओ तथा विविध प्रकार की प्रसन्नता अनुभव करो. (६)
य इन्द्र चमसेष्वा सोमश्चमूषु ते सुतः. पिबेदस्य त्वमीशिषे.. (७)
हे इंद्र! जो सोमरस चमस एवं चमू नामक पात्रों में रखा हुआ है, उसे तुम पिओ, क्योंकि तुम इसके स्वामी हो. (७)
यो अप्सु चन्द्रमा इव सोमश्चमूषु ददृशे. पिबेदस्य त्वमीशिषे.. (८)
हे इंद्र! चमू नामक पात्र में सोमरस इस प्रकार दिखाई देता है, जैसे जल में चंद्र दीखता
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