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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1314 of 1855

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Page 1314

इन्द्रः स्पळुत वृत्रहा परस्पा नो वरेण्यः.
स नो रक्षिश्वचरमं स मध्यमं स पश्चात्पातु नः पुरः.. (१५)
सर्वज्ञ, वृत्रहंता, दूसरों का पालन करने वाले एवं वरणीय इंद्र हमारे बड़े एवं बीच वाले
पुत्र की रक्षा करें. इंद्र आगे और पीछे से हमारी रक्षा करें. (१५)
त्वं नः पश्चादधरादुत्तरात्पुर इन्द्र नि पाहि विश्वतः.
आरे अस्मत्कृणुहि दैव्यं भयमारे हेतीरदेवीः.. (१६)
हे इंद्र! तुम पीछे, आगे, नीचे, ऊपर एवं सब ओर से हमारी रक्षा करो. तुम हमारे पास से
राक्षसों के आयुध एवं देवों का भय दूर करो. (१६)
अद्याद्या श्वः श्व इन्द्र त्रास्व परे च नः.
विश्वा च नो जरितृन्त्सत्पते अहा दिवा नक्तं च रक्षिषः.. (१७)
हे इंद्र! आज, कल एवं परसों हमारी रक्षा करना. हे साधुपालक इंद्र! हम स्तोताओं की
रक्षा रात एवं दिन सब समय करना. (१७)
प्रभङ्गी शूरो मघवा तुवीमघः सम्मिश्लो वीर्याय कम्.
उभा ते बाहू वृषणा शतक्रतो नि या वज्रं मिमिक्षतुः.. (१८)
धनस्वामी, दूसरों को हराने वाले, शूर एवं अधिक संपत्ति वाले इंद्र वीरता के लिए सबसे
मिलते हैं. हे बहुत कर्मों वाले इंद्र! तुम्हारी दोनों अभिलाषापूरक भुजाएं वज्र धारण करें.
(१८)
सूक्त—५१ देवता—इंद्र
प्रो अस्मा उपस्तुतिं भरता यज्जुजोषति.
उक्थैरिन्द्रस्य माहिनं वयो वर्धन्ति सोमिनो भद्रा इन्द्रस्य रातयः.. (१)
हे ऋत्विजो! इंद्र सेवा करते हैं, इसलिए उनके पास जाकर स्तुति करो. लोग सोमरस
पीने वाले इंद्र के अन्न को उक्थ मंत्रों द्वारा बढ़ाते हैं. इंद्र के दान कल्याण करने वाले हैं. (१)
अयुजो असमो नृभिरेकः कृष्टीरयास्यः.
पूर्वीरति प्र वावृधे विश्वा जातान्योजसा भ्रदा इन्द्रस्य रातयः.. (२)
किसी की सहायता न लेने वाले, अद्वितीय, देवों में प्रमुख और विनाशरहित इंद्र प्राचीन
प्रजाओं का अतिक्रमण करके बढ़ते हैं. इंद्र के दान कल्याण करने वाले हैं. (२)
अहितेन चिदर्वता जीरदानुः सिषासति.