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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1298 of 1855

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Page 1298

हे अधिक धन वाले व यज्ञकर्म के पार ले जाने वाले इंद्र! हम तुम्हारे समान व्यक्ति के
आश्रित हैं. तुम हरि नामक घोड़ों के स्वामी हो. (१)
त्वां हि सत्यमद्रिवो विद्म दातारमिषाम्. विद्म दातारं रयीणाम्.. (२)
हे वज्रधारी इंद्र! यह बात सत्य है कि हम तुम्हें अन्नों एवं धनों का दाता जानते हैं. (२)
आ यस्य ते महिमानं शतमूते शतक्रतो. गीर्भिर्गृणन्ति कारवः.. (३)
हे असंख्य रक्षासाधनों वाले एवं बहुकर्मकर्त्ता इंद्र! स्तोता तुम्हारी महिमा को स्तुतियों
द्वारा गाते हैं. (३)
सुनीथो घा स मर्त्यो यं मरुतो यमर्यमा. मित्रः पान्त्यद्रुहः.. (४)
वही मनुष्य यज्ञसंपन्न होता है, जिसकी रक्षा द्रोहरहित मरुद्गण, अर्यमा एवं मित्र करते
हैं. (४)
दधानो गोमदश्ववत्सुवीर्यमादित्यजूत एधते. सदा राया पुरुस्पृहा.. (५)
आदित्य द्वारा अनुगृहीत यजमान गायों एवं अश्वों से युक्त होकर तथा शोभनवीर्य वाली
संतान धारण करता हुआ बहुतों द्वारा अभिलषित धन के साथ बढ़ता है. (५)
तमिन्द्रं दानमीमहे शवसानमभीर्वम्. ईशानं राय ईमहे.. (६)
हम प्रसिद्ध, शक्तिशाली, भीरुतारहित एवं सबके स्वामी इंद्र से देने योग्य धन मांगते हैं.
(६)
तस्मिन्हि सन्त्यूतयो विश्वा अभीरवः सचा.
तमा वहन्तु सप्तयः पुरूवसुं मदाय हरयः सुतम्.. (७)
सब जगह जाने वाली, भीरुतारहित एवं सहायक मरुत्सेना इंद्र की है. गतिशील हरि
नामक अश्व बहुत धन वाले इंद्र को निचोड़े हुए सोमरस के निकट प्रसन्नता के लिए ले आवे.
(७)
यस्ते मदो वरेण्यो य इन्द्र वृत्रहन्तमः.
य आददिः स्व१र्नृभिर्यः पृतनासु दुष्टरः.. (८)
हे इंद्र! तुम्हारा मद वहन करने योग्य है. जो युद्ध में शत्रुओं का अधिक वध करने वाला
है. उसीके द्वारा तुम शत्रुओं से धन छीनते हो. वह मद युद्धों में बड़ी कठिनाई से पार किया
जाता है. (८)
यो दुष्टरो विश्ववार श्रवाय्यो वाजेष्वस्ति तरुता.
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