ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextहे वज्रधारी एवं अभिलाषापूरक इंद्र! हवि सेचन करने वाला मैं विचित्र स्तुतियों द्वारा
तुम्हें बुलाता हूं. तुम अपनी स्तुतियां स्वीकार करो. तुम्हारा आह्वान अभिलाषापूरक है. (३३)
सूक्त—१४ देवता—इंद्र
यदिन्द्रा॒हं यथा॒ त्वमीशी॑य॒ वस्व॒ एक॒ इत्. स्तो॒ता मे॑ गो॒सखा॑ स्यात्.. (१)
हे इंद्र! जिस प्रकार तुम एकमात्र धनस्वामी हो, उसी प्रकार यदि मैं भी ऐश्वर्य वाला बन
जाऊं तो मेरा स्तोता भी गाय वाला बन जाएगा. (१)
शिक्षे॑यमस्मै॒ दित्से॑यं शचीपते मनी॒षिणे॑. यद॒हं गो॑प॒तिः स्याम्.. (२)
हे शक्तिशाली इंद्र! यदि तुम्हारी कृपा से मैं गायों का स्वामी बन जाऊं तो इस स्तोता को
देने की इच्छा करूंगा एवं इसके द्वारा मांगी हुई संपत्ति दूंगा. (२)
धे॒नुष्ट॒ इन्द्र॑ सू॒नृता॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते. गामश्वं॑ पि॒प्युषी॑ दुहे.. (३)
हे इंद्र! तुम्हारी सच्ची एवं उन्नति करने वाली स्तुति दुधारू गाय बनकर सोमरस
निचोड़ने वाले यजमान को गाएं और घोड़े देती है. (३)
न ते॑ व॒र्त्तास्ति॒ राध॑स॒ इन्द्र॑ दे॒वो न मर्त्य॑:. यदि॑त्ससि स्तु॒तो म॒घम्.. (४)
हे इंद्र! तुम स्तुति सुनकर स्तोताओं को जो धन देना चाहते हो, उसे रोकने वाला न कोई
देवता है एवं न मनुष्य. (४)
य॒ज्ञ इन्द्र॑मवर्धय॒द्यद्भूमिं॒ व्यव॑र्तयत्. च॒क्राण ओ॒पशं॑ दि॒वि.. (५)
यज्ञ ने इंद्र को बढ़ाया था, क्योंकि इंद्र ने द्युलोक में जाकर मेघ को सुलाते हुए धरती को
स्थिर किया था. (५)
वा॒वृ॒धा॒नस्य॑ ते व॒यं विश्वा॒ धना॑नि जि॒ग्युष॑:. ऊ॒तिमिन्द्रा॑ वृणीमहे.. (६)
हे वर्धमान एवं शत्रुओं के सभी धन जीतने वाले इंद्र! हम तुम्हारी रक्षा को प्राप्त करते
हैं. (६)
व्य॑न्तरि॑क्षमतिरन्म॒दे सोम॑स्य रोच॒ना. इन्द्रो॒ यदभि॑नद्व॒लम्.. (७)
इंद्र ने सोमरस के नशे में तेजस्वी अंतरिक्ष को बढ़ाया है एवं शक्तिशाली मेघ का नाश
किया है. (७)
उद्गा आ॒जदङ्गिरो॑भ्य आवि॒ष्कृण्वन्गुहा॑ स॒तीः. अ॒र्वाञ्चं॑ नुनुदे व॒लम्.. (८)
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