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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1205 of 1855

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Page 1205

त्या न्व१श्विना हुवे सुदंससा गृभे कृता.
ययोरस्ति प्र णः सख्यं देवेष्वध्याप्यम्.. (३)
मैं शोभन कर्म वाले एवं हमारा हविष्य स्वीकार करने के लिए प्रकट होने वाले
अश्विनीकुमारों को बुलाता हूं. अश्विनीकुमारों की मित्रता सभी देवों में उत्तम मानी जाती है.
(३)
ययोरधि प्र यज्ञा असूरे सन्ति सूरयः.
ता यज्ञस्याध्वरस्य प्रचेतसा स्वधाभिर्या पिबतः सोम्यं मधु.. (४)
यज्ञ जिन अश्विनीकुमारों को वश में रखते हैं एवं बिना स्तोताओं वाले देश में भी
जिनकी स्तुति होती है, वे यज्ञ के उत्तम जानकार हैं. वे स्वधा शब्दों के साथ मधुर सोमरस
पिएं. (४)
यदद्याश्विनावपाग्यत्प्राक्स्थो वाजिनीवसू.
यद् द्रुह्यव्यनवि तुर्वशे यदौ हुवे वामथ मा गतम्.. (५)
हे अन्न एवं धन के स्वामी अश्विनीकुमारो! इस समय तुम लोग चाहे पूर्व दिशा में होओ,
चाहे पश्चिमी दिशा में, चाहे द्रुह्यु, अनु, तुर्वशु एवं यदु राजा के पास हो, मैं तुम्हें वहीं से
बुलाता हूं. तुम मेरे पास आओ. (५)
यदन्तरिक्षे पतथः पुरुभुजा यद्वेमे रोदसी अनु.
यद्वा स्वधाभिरधितिष्ठथो रथमत्त आ यातमश्विना.. (६)
हे अधिक हवि भक्षण करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम चाहे अंतरिक्ष में गमन करते
होओ अथवा द्यावा-पृथिवी की ओर जा रहे होओ, अथवा तेजरूपी रथ पर बैठे होओ, इन
सभी स्थानों से आओ. (६)
सूक्त—११ देवता—अग्नि
त्वमग्ने व्रतपा असि देव आ मर्त्येष्वा. त्वं यज्ञेष्वीड्यः.. (१)
हे अग्नि देव! तुम मनुष्यों में यज्ञकर्म की रक्षा करने वाले हो एवं यज्ञ में प्रशंसा करने
योग्य हो. (१)
त्वमसि प्रशस्यो विदथेषु सहन्त्य. अग्ने रथीरध्वराणाम्.. (२)
हे शत्रुओं को हराने वाले अग्नि! तुम यज्ञों में प्रशंसा करने योग्य एवं यज्ञों के नेता हो.
(२)
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