Skip to content
SarvaKosh
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1200 of 1855

Read in context
Page 1200

हे सत्य स्वभाव वाले अश्विनीकुमारो! चाहे तुम दूर रहो, चाहे समीप रहो. तुम अपने
स्थान से हजाररूपों वाले रथ के द्वारा आओ. (१४)
यो वां नासत्यावृषिर्गीर्भिर्वत्सो अवीवृधत्.
तस्मै सहस्रनिर्णिजमिषं धत्तं घृतश्रुतम्.. (१५)
हे अश्विनीकुमारो! जिस वत्स ऋषि ने तुम्हें अपने स्तुतिवचनों के द्वारा बढ़ाया, उनके
लिए घी टपकाने वाला हजाररूपों का अन्न दो. (१५)
प्रास्मा ऊर्जं घृतश्रुतमश्विना यच्छतं युवम्.
यो वां सुम्नाय तुष्टवद्वस्रूयाद्वानुनस्पती.. (१६)
हे दान के अधिपति अश्विनीकुमारो! स्तोता के लिए घी टपकाने वाला एवं बलकारक
अन्न दो. इन्होंने धन की इच्छा करके हमारे सुख के लिए स्तुति की थी. (१६)
आ नो गन्तं रिशादसेमं स्तोमं पुरुभुजा.
कृतं नः सुश्रियो नरेमा दातमभिष्टये.. (१७)
हे शत्रुक्षक एवं अधिक हवि का उपयोग करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम हमारी स्तुति
सुनने के लिए आओ. हमें शोभन धन वाला बनाओ एवं सांसारिक वस्तुएं दो. (१७)
आ वां विश्वाभिरूतिभिः प्रियमैधा अहूषत.
राजन्तावध्वराणामश्विना यामहूतिषु.. (१८)
हे अश्विनीकुमारो! प्रियमैध ऋषियों ने यज्ञ के समय तुम्हें सभी रक्षासाधनों सहित
बुलाया था. तुम यज्ञ में शोभा पाओ. (१८)
आ नो गन्तं मयोभुवाश्विना शम्भुवा युवम्.
यो वां विपन्यू धीतिभिर्गीर्भिर्वतसो अवीवृधत्.. (१९)
हे सुख देने वाले, रोगनाश करने वाले एवं स्तुति-योग्य अश्विनीकुमारो! जिन ऋषियों ने
तुम्हें स्तुतियों द्वारा बढ़ाया था, उनके सामने आओ. (१९)
याभिः कण्वं मेधातिथिं याभिर्वशं दशव्रजम्.
याभिर्गोशर्यमावतं ताभिर्नोऽवतं नरा.. (२०)
हे नेता अश्विनीकुमारो! जिन साधनों से तुमने कण्व, मेधातिथि, वश, दशव्रज एवं गोशर्य
की रक्षा की थी, उन्हीं साधनों द्वारा हमें अन्न पाने के लिए बचाओ. (२०)
याभिर्नरा त्रसदस्युमावतं कृत्व्ये धने.
ताभिः ष्वीस्माँ अश्विना प्रावतं वाजसातये.. (२१)
ebook converter DEMO Watermarks*