ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextचक्षुर्मित्रस्य वरुणस्य देवश्चर्मेव यः समविव्यक् तमांसि.. (१)
शोभनभाग्य वाले, सब मनुष्यों के प्रति समान, मित्र एवं वरुण के चक्षु के समान एवं
दीप्तिशाली सूर्य उदित हो रहे हैं. वे चमड़े के समान अंधकार को लपेटते हैं. (१)
उद्वेति प्रसवीता जनानां महान् केतुरर्णवः सूर्यस्य.
समानं चक्रं पर्याविवृत्सन्यदेतशो वहति धूर्षु युक्तः.. (२)
मनुष्यों को अपने-अपने काम में लगाने वाले, पूज्य, ज्ञापन एवं जल देने वाले सूर्य
सबके पहियों को समान रूप से चलाने की इच्छा से उदित होते हैं. रथ में जुड़े हुए हरे रंग के
घोड़े सूर्य को खींचते हैं. (२)
विभ्राजमान उषसामुपस्थाद् रेभैरुदेत्यनुमद्यमानः.
एष मे देवः सविता चच्छन्द यः समानं न प्रमिनाति धाम.. (३)
अतिशय दीप्तिशाली ये सूर्य स्तोताओं की स्तुतियां सुनकर प्रमुदित होते हुए उषाओं के
बीच में उदित होते हैं. ये सविता देव मेरी अभिलाषाएं पूरी करते हैं. ये सभी प्राणियों के लिए
एकरूप अपने तेज को संकुचित नहीं करते. (३)
दिवो रुक्म उरुचक्षा उदेति दूरे अर्थस्तरणिर्भ्राजमानः.
नूनं जनाः सूर्येण प्रसूता अयन्नर्थानि कृणवन्नपांसि.. (४)
अति तेजस्वी, दीप्तिशाली, दूर तक जाने वाले एवं तारक सूर्य अंतरिक्ष में चमकते हुए
उदित होते हैं. सूर्य से उत्पन्न लोग निश्चय ही कर्त्तव्य समझकर कर्म करते हैं. (४)
यत्रा चक्रुरमृता गातुमस्मै श्येनो न दीयन्नन्वेति पाथः.
प्रति वां सूर उदिते विधेम नमोभिर्मित्रावरुणोत हव्यैः.. (५)
मरणरहित देवों ने अंतरिक्ष में सूर्य के लिए मार्ग बनाया था. वह मार्ग उड़ते हुए गिद्ध के
समान अंतरिक्ष का अनुगमन करता है. हे मित्र व वरुण! सूर्य के उदय होने पर हम नमस्कारों
व हव्यों द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. (५)
नू मित्रो वरुणो अर्यमा नस्त्मने तोकाय वरिवो दधन्तु.
सुगा नो विश्वा सुपथानि सन्तु यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६)
मित्र, वरुण एवं अर्यमा हमारे लिए तथा हमारे पुत्रों के लिए धन दें. सभी मार्ग हमारे
लिए उत्तम एवं चलने में सरल हों. हे देवो! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी रक्षा करो.
(६)
सूक्त—६४ देवता—मित्र व वरुण
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