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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

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DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1101 of 1855

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Page 1101

हे मरुतो! हमारा पुत्र शक्तिशाली हो. वह बुद्धिमान् एवं शत्रुओं को सहन करने वाला हो.
हम शोभननिवास पाने के लिए उसकी सहायता से शत्रुओं को वश में करेंगे एवं तुम्हारी
आत्मीयता का स्थान प्राप्त करेंगे. (२४)
तन्न इन्द्रो वरुणो मित्रो अग्निरप ओषधीर्वनिनो जुषन्त.
शर्मन्त्स्याम मरुतामुपस्थे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (२५)
इंद्र, वरुण, मित्र, अग्नि, जल, ओषधियां एवं वृक्ष हमारे स्तोत्र को सुनें. मरुतों के समीप
रहकर हम सुखी रहेंगे. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (२५)
सूक्त—५७ देवता—मरुद्गण
मध्वो वो नाम मारुतं यवत्राः प्र यज्ञेषु शवसा मदन्ति.
ये रेजयन्ति रोदसी चिदुर्वी पिन्वन्त्युत्सं यदयांसुरुग्राः.. (१)
हे यज्ञपात्र मरुतो! प्रमुदित स्तोता यज्ञ में तुम्हारी स्तुति शक्ति द्वारा करते हैं. वे मरुद्गण
विस्तृत द्यावा-पृथिवी को कंपित करते हैं, बादलों से जल बरसाते हैं एवं उग्र बनकर सब
जगह जाते हैं. (१)
निचेतारो हि मरुतो गृणन्तं प्रणेतारी यजमानस्य मन्म.
अस्माकमद्य विदथेषु बर्हिरा वीतये सदत पिप्रियाणाः.. (२)
मरुद्गण स्तुति करने वाले मनुष्य को खोजते हैं एवं यजमान की कामना पूरी करते हैं.
हे मरुतो! तुम लोग प्रसन्न होकर सोमरस पीने के लिए हमारे यज्ञ में कुशों पर बैठो. (२)
नैतावदन्ये मरुतो यथेमे भ्राजन्ते रुक्मैरायुधैस्तनूभिः.
आ रोदसी विश्वपिशः पिशानाः समानमञ्ज्यञ्जते शुभे कम्.. (३)
ये मरुद्गण जितना दान करते हैं, उतना दूसरे लोग नहीं करते. ये अपने हारों, अलंकारों
एवं शरीरों से सुशोभित होते हैं. व्याप्त दीप्तिवाले मरुद्गण द्यावा-पृथिवी को प्रकाशित करते
हुए शोभा के लिए समान आभूषण धारण करते हैं. (३)
ऋधक्सा वो मरुतो दिद्युदस्तु यद्व आगः पुरुषता कराम.
मा वस्तस्यामपि भूमा यजत्रा अस्मे वो अस्तु सुमतिश्चनिष्ठा.. (४)
हे मरुतो! तुम्हारा प्रसिद्ध आयुध हमसे दूर रहे. यज्ञपात्र मरुतो! यद्यपि मनुष्य होने के
कारण हम बहुत सी भूल करते हैं, पर हम तुम्हारे आयुध के लक्ष्य न हों. तुम्हारी अधिक अन्न
देने वाली कृपा हमारी है. (४)
कृते चिदत्र मरुतो रणन्तानवद्यासः शुचयः पावकाः.