ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1084 of 1855
Read in contextयोग्य धन हमें दो. हम आज अपने सहायक देवों से मिलेंगे. (६)
नू रोदसी अभिष्टुते वसिष्ठैर्ऋतावानो वरुणो मित्रो अग्निः.
यच्छन्तु चन्द्रा उपमं नो अर्कं यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७)
वसिष्ठगोत्रीय ऋषियों ने आज धरती एवं आकाश की भलीप्रकार स्तुति की है. उन्होंने
यज्ञ वाले वरुण, मित्र एवं अग्नि की भी स्तुति की है. प्रमुदित करने वाले देव हमें प्रजा के
योग्य एवं सबसे अच्छा अन्न दें एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करें. (७)
सूक्त—४० देवता—विश्वेदेव
ओ श्रुष्टिर्विदथ्या३ समेतु प्रति स्तोमं दधीमहि तुराणाम्.
यदद्य देवः सविता सुवाति स्यामास्य रत्निनो विभागे.. (१)
हे देवो! तुम्हारे मन द्वारा संपादित होने वाला सुख हमें प्राप्त हो. हम तेज चलने वाले
देवों के लिए स्तोत्र बनाते हैं. रत्नों के स्वामी सविता आज जो धन हमारे पास भेजेंगे, हम
उसी धन के भागी होंगे. (१)
मित्रस्तन्नो वरुणो रोदसी च द्युभक्तमिन्द्रो अर्यमा ददातु.
दिदेष्टु देव्यदिति रेक्णो वायुश्च यन्नियुवैते भगश्च.. (२)
मित्र एवं वरुण, द्यावा-पृथिवी, इंद्र एवं अर्यमा हमें वही स्तोताओं द्वारा प्रशंसित धन दें.
अदिति देवी हमें धन दें. वायु एवं भग हमारे लिए उसी धन की योजना करें. (२)
सेदुग्रो अस्तु मरुतः स शुष्मी यं मर्त्यं पृषदश्वा अवाथ.
उतेमग्निः सरस्वती जुनन्ति न तस्य रायः पर्येतास्ति.. (३)
हे हरिणरूप वाहनसाधनों वाले मरुतो! तुम जिस मनुष्य की रक्षा करते हो, वह उग्र एवं
बलवान् हो. अग्नि, सरस्वती आदि देवगण जिस यजमान को यज्ञ की प्रेरणा देते हैं, उसके
धन का कोई बाधक नहीं है. (३)
अयं हि नेता वरुण ऋतस्य मित्रो राजानो अर्यमापो धुः.
सुहवा देव्यदितिरनर्वा ते नो अंहो अति पर्षन्नरिष्टान्.. (४)
यज्ञ को प्राप्त करने वाले ये शक्तिशाली वरुण, मित्र एवं अर्यमा देव हमारे यज्ञकर्म को
धारण करते हैं. किसी के द्वारा न रुक सकने वाली अदिति देवी हमारी पुकार सुने. ये देव हमें
बाधा पहुंचाए बिना हमारे पापों को नष्ट करें. (४)
अस्य देवस्य मीळुषो वया विष्णोरेषस्य प्रभृथे हविर्भिः.
विदे हि रुद्रो रुद्रियं महित्वं यासिष्टं वर्तिरश्विनाविरावत्.. (५)
ebook converter DEMO Watermarks*