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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1001 of 1855

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Page 1001

जुषस्व नः सख्या वेश्या च मा त्वत्क्षेत्राण्यरणानि गन्म.. (१४)
हे सरस्वती! हमें प्रसिद्ध धन के पास ले चलो. हमारी अवनति मत करो. हमें जलद्वारा
पीड़ा न पहुंचाओ. हमारे मैत्रीकार्यों और प्रवेशों को स्वीकार करो. हम तुम्हारे पास से वनों
अथवा बुरे स्थानों में न जावें. (१४)
सूक्त—६२ देवता—अश्विनीकुमार
स्तुषे नरा दिवो अस्य प्रसन्ताश्विना हुवे जरमाणो अर्कैः.
या सद्य उस्रा व्युषि ज्मो अन्तान्युयुषतः पर्युंरू वरांसि.. (१)
मैं स्वर्ग के नेता एवं भुवन के स्वामी अश्विनीकुमारों की स्तुति करता हूं एवं मंत्रों द्वारा
उनकी प्रशंसा करता हुआ उन्हें बुलाता हूं. वे तुरंत शत्रुओं का निवारण करते हैं तथा रात्रि की
समाप्ति पर धरती को ढकने वाला अंधेरा दूर करते हैं. (१)
ता यज्ञमा शुचिभिश्चक्रमाणा रथस्य भानुं रुरुचू रजोभिः.
पुरू वरांस्यमिता मिमानापो धन्वान्यति याथो अज्रान्.. (२)
मेरे यज्ञ की ओर आते हुए अश्विनीकुमार अपने निर्मल तेजों से अपने रथ की दीप्ति
प्रकट करते हैं एवं विविध तेजों को असीमित बनाते हुए जल प्राप्ति के लिए अपने घोड़ों को
मरुभूमि के पार ले जाते हैं. (२)
ता ह त्यद्धर्तिर्यदरध्रमूग्रेत्था धिय ऊहथुः शश्वदश्वैः.
मनोजवेभिरिषि रैः शयध्यै परि व्यथिर्दाशुषो मर्त्यस्य.. (३)
हे उग्र अश्विनीकुमारो! तुम यजमान के दरिद्र घर को समृद्ध बनाने के लिए जाते हो. तुम
स्तोताओं द्वारा अभिलषित एवं मन के समान वेगशाली घोड़ों द्वारा स्तोताओं को स्वर्ग में ले
जाओ एवं हव्य देने वाले मनुष्य के शत्रुओं को गहरी नींद में सुला दो. (३)
ता नव्यसो जरमाणस्य मन्मोप भूषतो युयुजानसप्ती.
शुभं पृक्षमिषमूर्जं वहन्ता होता यक्षत्प्रत्नो अध्रिगुं युवाना.. (४)
रथ में घोड़े जोड़ते हुए, शोभन अन्न, पुष्टि एवं रस को वहन करते हुए अश्विनीकुमार नए
स्तोता के स्तोत्र के समीप जाते हैं. हे होता, प्राचीन एवं द्रोहहीन अग्नि! युवा अश्विनीकुमारों
का यज्ञ करो. (४)
ता वल्गू दस्रा पुरुशाकतमा प्रत्ना नव्यसा वचसा विवासे.
या शंसते स्तुवते शम्भविष्ठा बभूवतुर्गृणते चित्रराती.. (५)
मैं नवीन स्तुतियों द्वारा उन्हीं रुचिर, अनेक-कर्म करने वाले तथा प्राचीन अश्विनीकुमारों
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