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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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तृतीयोऽध्यायः। १०५

जाता है । गन्धक गोदन्ती और चूने के साथ शिरा, मृत्तिका, राल का शकल का तथा रवों आदि के रूप में जमा पाया जाता है ।

गन्धक निम्न रूप में मिलता है ।

  • ( १ ) रवेदार गन्धक ( Crystalline Forms )
    • ( क ) अष्टफलकीय रवेदार गन्धक ( Octahedral sulphur )
    • ( ख ) त्रिपाश्र्वीय रवेदार गन्धक ( Prismatic sulphur )
  • ( २ ) बिना रवेदार गन्धक ( Amorphous forms )
    • ( अ ) नम्य गन्धक ( Plastic sulphur )
    • ( ब ) श्वेत रवे रहित ( White Amorphous )
    • ( म ) पीत रवे रहित ( Yellow amorphous )
  • ( ३ ) द्रवितगन्धक ( Colloidal sulphur )

गन्धक और गन्धकाय खनिज प्राप्ति के स्थान

अफगानिस्तान—
के हजार जाठ ( Hazara Jat ) नामक स्थान में प्राकृतिक गन्धक बहुतायत से प्राप्त होता है ।
पीत गन्धक के डले और शिरायें गोदन्ती के खण्डों के साथ “दस्त-ह-सफेद” ( Dast i-safed ) नामक स्थान के आस पास में मिलता है ।

आसाम—
के लखिमपुर जिले के “माकुम” ( Makum ) ग्राम में माक्षिक के खण्ड ( Shales ) भुगर्भज कोयले के साथ ऊपर आसाम में प्राप्त होते हैं । किन्तु इनकी मात्रा इतनी नहीं है कि जिससे गन्धक निकाल कर व्यापारिक लाभ उठाया जा सके ।

बलुचिस्तान ( Baluchistan )
के कोह-इ-सुलतान ( Koh-i-sultan ) नामक स्थान में प्रशान्त ज्वालामुखी के आस पास के परिवर्त्तित स्थानों में पीत गन्धक और गौदन्ती पाये जाते हैं । यहां के निवासी खनिज गन्धक को नांदो में भर कर गरम करते हैं। जब गन्धक पिघल जाता है तब उसे तसलों की शकल के ढांचों में ढाल कर अन्य पार्थिव अशुद्धियों से शुद्ध कर लिया करते हैं । “बोलन पास के “द्राज बेन्ट” ( Draj Bent ) और गोकुर्थ ( Gokurth ) नामक स्थानों में भी मृत्तिकाकृति चूने के साथ गन्धक पाया जाता है । किन्तु यहां से उसकी निकासी कठिन है ।

कच्छी ( Kachhi )
जिले के सन्नी ( Sanni ) नामक स्थान में गन्धक की बड़ी खान रही है । सन् १८४६ ई० हुटन ( Huttan ) नामक अंग्रेज ने इस स्थान को जाकर देखा था ।