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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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४४ रसत्नसमुच्चये -

स्थान पर दानेदार और किसी स्थान पर मृत्तिकाकृति का हिङ्गुल जमा मिलता है। यहां के हिङ्गुल के सहयोग में गन्धक, ओपल, स्फटिक और रौप्यमाक्षिक पाये जाते हैं। बेकर (Becker) का कथन है कि सल्फर बैंक के अन्तराल को खान केलिफोर्निया के प्रधान पारदीय खानों के मुकाबले की है।

१९१७ में सल्फर-बैंक नामक खानों का माल ८००,००० टन बाष्प यन्त्रों से पीसा गया था और सब से अधिक पारद इस देश से सन् १९१८ में निकाला गया, किन्तु सन् १९१९ में फिर पारद की निकासी नाम शेष रह गई। लेक ज़िले में पारद निकालने के स्थान सेन्ट जोन्स (St Johns) और हेलन (Helen) हैं। नापा ज़िले में सन् १८६३ से १९१९ तक ३३८९११ फ्लास्क पारद की निकासी हुई। इस के अतिरिक्त कोरोना ((Corona), नाक्से विल (Knox ville), मनहाटन (Manhattan) नामक खानों में भी रक्त हिङ्गुल, कृष्ण हिङ्गुल, रौप्यमाक्षिक, गन्धक, स्टिबनाइट के साथ पाया जाता है, किन्तु सन् १९२० से इन खानों का व्यवसाय बन्द है। ओट हिल (oat Hill) की खान में रेणुशिला के अन्दर जमा हुआ हिङ्गुल पाया जाता है। सन् १८७६ से १९१७ तक १९२५६६ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। सानबेनिटो (San Benito) ज़िले में ३३४२५९ फ्लास्क पारद सन् १८६५ से १९१९ तक निकाला गया। अमेरिका के संयुक्त राज के पारद निकासी का यह ज़िला सब से अधिक उपजाऊ समझा जाता है। न्यू इड्रिया की खान से इस स्टेट के सब पारद निकासी की अपेक्षा आधा पारद निकाला गया है। न्यू इड्रिया की खान में अधिकतर कृष्ण हिगुल पाया जाता है। यहां पारद प्राप्ति का स्थान २।। मील के फैलाव में है। १५-२० मील भूगर्भ के अन्तराल में खुदाई का काम हो रहा है। सान, लुइस, ओबिस्पो जिलों (San Luis obispo country) में वहां के आदिमनिवासी (Indians) शताब्दियों से हिङ्गुल को रङ्ग के काम में उपयोग करते हैं। व्यापारियों ने सब से प्रथम सन् १८६२ में इस स्थान के खान की रक्षा की और सन् १८७६ से १९१८ तक ४९६०० फ्लास्क पारद निकला।

क्लो (Klau) नामक खान से १४२१३ फ्लास्क पारद निकाल कर सन् १९१६ में काम बन्द कर दिया गया था और फिर सन् १९१९ में प्रारम्भ हुआ। यहाँ पर हिङ्गुल स्फटिक और रौप्य माक्षिक के सह योग में पाया जाता है।

ओसीनिक (Oceanic) नामक खान से १९१७ के अन्त तक २३५५१ फ्लास्क पारद निकाला गया था। इस ज़िले में केवल इसी खान से सन् १९१८ में १४६० फ्लास्क पारद की निकासी हुई। यहां की भूमि मे हिङ्गुल एकसा सर्वत्र पाया जाता है। यहां सन् १९१९ में पारद का एक ओर खनिज १५० फुट की गहराई पर पाया गया है।