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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

by रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री)

Source: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (origin)

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DevanagariHindipublished362 pages

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रसरत्नसमुच्चये—

जाती है। इस निकासी में भी टेक्सास से ३१ फ्लास्क, केलिफोर्निया से ३०९१, नवाडा से १०० और इहाडो से १ फ्लास्क पारद निकला है। सन् १९१७ से अलस्का और एरिजोना से पारद बिलकुल नहीं निकाला गया। इसी प्रकार इहाडो से सन् १९१९ और १९२० में औरेगन से १९२१ में एक दम पारद की निकासी नहीं हुई।

अलस्का ( Alaska )
इस प्रदेश में जार्ज टाउन ( GeorgeTown ) के १५ मील ऊपर नदी के उत्तरी किनारे पर १९०६ में हिङ्गुल के अस्तित्व का पता लगा है और वहां पारद निकालने का कार्य प्रारम्भ किया गया।

यहां पर स्टिबनाइट ( Stibnite ), स्फटिक ( quarty ), साइडराइट ( Side-rite ) आदि खनिज के सहयोग में हिङ्गुल पाया जाता है। स्टिबनाइट ( एन्टिमनि सल्फाइड ) और हिङ्गुल मालूम होता है कि साथ ही साथ भूगर्भ से निकल कर जमा हुए हैं; क्योंकि ये एक दूसरे पर जमे हुए पाये जाते हैं। कहीं पर स्टिबनाइट पर हिंगुल जमा हुआ मिलता है तो कहीं पर स्टिबनाइट हिङ्गुल पर। जहां पर ये खनिज प्राप्त होते हैं वह स्थान दुर्गम होने के कारण पारद निकालने का कार्य बन्द सा रहा तथापि सन् १९१९ में वहां पर नवीन पद्धति से कार्य प्रारम्भ किया गया और जो माल निकला वह वहां के ही व्यवसायियों के हाथ बेच दिया गया। इसी नदी के बहाव की तरफ १०० मील नीचे की ओर एक स्थान पर हिंगुल पाया गया है। किन्तु वहां पर भी पारद निकासी का कार्य अब तक प्रारम्भ नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त भी अन्य कई स्थानों में हिंगुल पाया जाता है और सैकड़ों पाउण्ड निकाला जा सकता है। नोमे सीवार्ड पेनिन्सुला ( Nome seward peninsule ) से लगभग ६० मील की दूरी पर 'पलेसर माइनिङ्ग डेनियल क्रीक' नामक स्थान है वहाँ पर एकत्रित संगृहीत रूप से अच्छी मात्रा में हिंगुल मिलता है। इसी ज़िले में एक स्थान और है जिसे 'फ्लेसर्स आफ ऐरन क्रीक' कहते हैं वहां पर हिंगुल का जमाव अधिक मात्रा में है।

एरिज़ोना ( Arizona )
इस प्रदेश में ६ मील तक लम्बे और ११ मील तक के चौड़े फैलाव में पारदीय खनिज पाये जाते हैं। जिस भाग में हिंगुल मिलता है वह ३०० से ५०० फीट की दूरी पर क्षेत्र रूप से विभक्त है। पारद निकालने का सारा कार्य खनिज की अधिकता को देख कर बीच के भाग में प्रारम्भ हुआ है। यहां पर हिङ्गुल पृथ्वी की शिरा और छोटे ३ गर्त व खण्डहरों में पाया जाता है। कभी कभी रौप्यमाक्षिक, सुवर्णमाक्षिक, गरिक आदि के साथ में भी हिंगुल मिल जाता है। एक स्थान पर ३ मील चौड़ा हिंगुल प्राप्ति का क्षेत्र है, जहां पर कृष्ण और रक्त दोनों प्रकार का हिंगुल, स्फटिक,