झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (१८५७ स्वातन्त्र्य समर की अमर वीरांगना शौर्य इतिहास)
Rani Lakshmibai of Jhansi Historical Biography
by वृन्दावनलाल वर्मा / ऐतिहासिक शोध
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Read in contextप्रस्तावना
[ १ ]
ईस्ट इण्डिया कम्पनी के प्रतिनिधि ने झाँसी के शासक रामचन्द्रराव
के पास खरीता भेजा, 'नवाब गवर्नर जनरल साहब, लार्ड विलियम-
वेन्टिक ने आपको आज से राजा की उपाधि दी है। कम्पनी सरकार की
मित्रता के प्रतीक रूप में यूनियन-जैक झण्डा आपको भेट किया जाता
है। इसके गौरव की रक्षा कीजियेगा।'
झाँसी के किले वाले महल के मैदान मे, धूमधाम और तडक-भडक के
साथ जो दरबार सन् १८३२ में हुआ था उसमे उपरोक्त घोषणा सुनाई
गई थी। रामचन्द्रराव ने उपाधि और पताका सहर्ष ग्रहण की। झाँसी
के शासक के साथ कम्पनी की सबसे पहली सन्धि सन् १८२४ में हुई
थी। उस समय पन्त प्रधान (पेशवा) बाजीराव द्वितीय की मातहती में
शिवराव भाऊ झाँसी के शासक थे और वह सूबेदार कहलाते थे। यह
सन्धि परस्पर मैत्री और सहायता के आधार पर की गई थी। पेशवाई
निर्बल हो चुकी थी। सूबेदार सशक्त थे। बुन्देलखण्ड़ को अधिकृत करने
के लिए अङ्गरेजो को झाँसी के सूबेदार की मित्रता अभीष्ट थी।
इस सन्धि का बुन्देलखण्ड के रजवाडो पर प्रभाव पडा।