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रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)

Autobiography of Ram Prasad Bismil

by पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी)

DevanagariHindipublished128 pages

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Page 88

76 रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा
रामनाथ पाण्डेय के पत्र पुलिस के पास
पहुँचे थे। अतः इंदुभूषण को गिरफ्तार किया
गया। इंदुभूषण ने दूसरे दिन अपना बयान
दे दिया। गिरफ्तार किए हुए व्यक्तियों में
से कुछ से मिल-मिलाकर बनारसीलाल ने
भी, जो शाहजहाँपुर की जेल में था, अपना
बयान दे दिया और वह सरकारी गवाह
बना लिया गया। वह कुछ अधिक जानता
था। इसके बयान से क्रांतिकारी पत्र के
पार्सलों का पता चला। बनारस के डाकखाने
से जिन-जिनके पास पार्सल भेजे गए थे
रामकृष्ण खत्री उनको पुलिस ने गिरफ्तार किया। कानपुर
में गोपीनाथ ने, जिसके नाम से पार्सल गया था, गिरफ्तार होते ही पुलिस को
बयान दे दिया और वह सरकारी गवाह बना लिया ,गया। इसी प्रकार रायबरेली में
स्कूल के विद्यार्थी कुँवर बहादुर के पास पार्सल आया था, उसने भी गिरफ्तार होते
ही बयान दे दिया और सरकारी गवाह बना लिया गया। इनके पास मनीआर्डर भी
आया करते थे, क्योंकि यह बनवारीलाल का पोस्ट बॉक्स (डाक पाने वाला) था।
इसने बनवारीलाल के एक रिश्तेदार का पता बता दिया, जहाँ तलाशी लेने से
बनवारीलाल का एक ट्रंक मिला। इस ट्रंक में एक कारतूसी पिस्तौल, एक कारतूसी
फौजी रिवाल्वर तथा कुछ कारतूस पुलिस के हाथ लगे। श्री बनवारीलाल की खोज
हुई। बनवारीलाल भी पकड़ लिए गए। गिरफ्तारी के थोड़े दिनों बाद ही पुलिस
''वाले मिले, उल्टा-सीधा सुझाया और बनवारीलाल ने भी अपना बयान दे दिया
तथा इकबाली मुलजिम बनाए गए। बनवारीलाल ने काकोरी डकैती में अपना
सम्मिलित होना बताया था। उधर कलकत्ते में दक्षिणेश्वर में एक मकान में
बमबनाने का सामान, एक बना हुआ बम, 7 रिवाल्वर, पिस्तौल तथा कुछ