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रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

by महाकवि कालिदास

Source: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (origin)

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DevanagariHindipublished735 pages

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आक्रमण नहीं करते थे। जैसे दक्ष के शाप से चन्द्रमा को क्षय हो गया था वैसे ही अधिक विलास में आसक्त रहने के कारण उसे भी क्षय हो गया और धीरे-धीरे बढ़ने लगा। धीरे-धीरे उसका शरीर पीला पड़ गया, दुर्बलता के कारण उसने आभूषण पहनना भी छोड़ दिया। नौकरों के कन्धे का सहारा लेकर चलने लगा। बोली धीमी पड़ गयी यक्ष्मा रोग से सूखकर विरहियों के समान दिखाई देने लगा। राजा के क्षय रोग से पीड़ित होने पर सूर्य्यकुल ऐसा रह गया जैसे एक कलाभर बचा हुआ कृष्णपक्ष की चतुर्दशी का चन्द्रमा हो। जब प्रजा पूछती थी कि राजा को कोई भयानक रोग तो नहीं है। उस समय मन्त्री लोग यह कहकर समझाते कि राजा इस समय पुत्रोत्पत्ति के लिए व्रत आदि कर रहे हैं, इसीलिए दुर्बल होते जा रहे हैं। अनेक रानियों के रहते हुए भी वह राजा पुत्र का मुंह नहीं देख पाया। जैसे वायु के आगे दीपक का कुछ भी वश नहीं चलता वैसे ही राजा भी रोग से नहीं बचाया जा सका। पुरोहितों से मिलकर मन्त्रियों ने रोग-शान्ति के बहाने राजा के शव को राजभवन के उपवन में ही चुपचाप जलती आग में रख दिया और मन्त्रियों ने झट नेताओं को इकट्ठा कर सर्वसम्मति से उस पटरानी को राजसिंहासन पर बैठा दिया जिसमें गर्भ के शुभ चिह्न दिखाई देते थे। राजा की दुःखदमृत्यु से रानी की आँखों में गरम-गरम आँसुओं से तपे हुए गर्भ पर अभिषेक के शीतल जल पड़े तब वह गर्भ शीतल हो गया। इस प्रकार गर्भ ग्रहण किए वह महारानी प्रजा की भलाई के लिए मन्त्रियों की सलाह से भली भांति राजकार्य चलाती रही जिसकी आज्ञा को कोई टाल नहीं सकता था। रघुवंश के अनुसार इसी महारानी के गर्भ से उत्पन्न बालक रघुवंश का अन्तिम राजा माना गया है।