Skip to content
SarvaKosh
रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

रघुवंशम् (मल्लिनाथ संजीवनी व श्रीकृष्णमणि त्रिपाठी हिन्दी व्याख्या)

Raghuvamsham of Kalidasa Hindi

by महाकवि कालिदास

Source: Raghuvamsham with Mallinatha Sanjivani & Hindi Commentary by Dr. Shrikrishnamani Tripathi (origin)

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished735 pages

Page 35 of 735

Read in context
Page 35

( २० )

खिड़की पर आ पहुँचीं। दूसरी सुन्दरी जो दासी से अपने पैरों में महावर लगवा रही थी; शीघ्रता में उसे छुड़ाकर वह झरोखे तक गीली महावर से पैर का निशान बनाती गयी, तीसरी एक आंख में काजल लगाकर दूसरे में बिना लगाये ही हाथ में सलाई लिये दौड़ पड़ी, चौथी साड़ी की नीवी बिना बांधे ही हाथ से पकड़कर खिड़की में दृष्टि लगाकर खड़ी रही, पांचवी बैठकर मोतियों की करधनी गूँथ रही थी। जिसका एक किनारा अपने पैर के अंगूठे में बांध रखा था, अभी आधी ही गूँथ पायी थी कि अज को देखने की जल्दी में उसे छोड़कर ऐसी दौड़ी कि खिड़की तक एक-एक दाने बिखर गये, उसके अँगूठे में केवल धागा ही धागा लिपटा रह गया।

उन नागरिक स्त्रियों के मुखों से परिपूर्ण झरोखे ऐसे प्रतीत होते थे, मानों चञ्चल नेत्र रूपी भौरों से व्याप्त कमलों से भरे हैं। अज को भली-भांति देखकर वे प्रसन्नता व्यक्त करती हुई कहने लगीं कि स्वयंवर करना अच्छा हुआ, नहीं तो इन्दुमती समान योग्य पति को कैसे पाती ! यदि ब्रह्मा इन दोनों की जोड़ी नहीं लगाता तो, इन दोनों का सौन्दर्य विधान ही व्यर्थ हो जाता। ये दोनों पूर्व जन्म में रति एवं कामदेव होंगे, नहीं तो इन्दुमती ने हजारों राजाओं में इन्हीं अज को क्यों वर लिया ? इस प्रकार नगर की नारियों का वर्णन सुनते हुए अज भोज के घर पहुँच कर कामरूप के राजा का बाहु पकड़कर हथिनी से उतरकर अन्दर चोक में चले गये।

वहाँ राजा भोज ने वैदिक विधि-विधान से मधुपर्क-वस्त्र आदि देकर विवाह कृत्य आरम्भ किया, पुरोहित ने हवन के बाद अग्नि को साक्षी बनाकर वर-वधू को मिला दिया। यहाँ वैवाहिक कार्यों को अत्यन्त स्वाभाविक एवं सामाजिक नियमोपनिगमों का मनोरम वर्णन है। इस प्रकार विवाह के बाद भोज ने दूसरे राजाओं को यथावत् सत्कार कर विदा किया।

ये ईर्ष्यालु राजा लोग इन्दुमती को अज से बलात् छीन लेने की इच्छा से आगे बढ़कर मार्ग में बैठ गये। इधर भोज ने अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार दहेज देकर बहन को विदा किया। तीन रात तक इनके साथ में रहकर भोज पुनः अपनी राजधानी को लौट गये। बाद मार्ग रोकनेवाले राजा लोग इन्दुमती को ले जाते हुए अज को रोककर युद्ध के लिए तैयार हो गये। अज ने इन्दुमती की रक्षा के निमित्त विश्वासी मंत्री को नियत कर युद्ध करने के लिए रणाङ्गण में उतर गये। दोनों पक्षों के सैनिकों के साथ घमासान युद्ध होने लगा।