पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
by महर्षि पराशर
Source: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (origin)
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Read in context५० पाराशरस्मृतिः [ षष्ठो-
उपर्युक्त प्रकार की विधि करने से उस अग्निहोत्री को निश्चय ही
ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है और जो ब्राह्मण इस प्रकार दाहसंस्कार
करते हैं वे भी उत्तम लोक को प्राप्त करते हैं ॥२४॥
अन्यथा कुर्वते कर्म त्वात्मबुद्ध्या प्रचोदिताः ।
भवन्त्यल्पायुषस्ते वै पतन्ति नरकेऽशुचौ ॥२५॥
इति पाराशरीये धर्मशास्त्रे पञ्चमोऽध्यायः ॥ ५ ॥
जो लोग अपनी बुद्धि की कल्पना से अन्यथा ( विपरीत ) काम
करते हैं वे अल्पायु होकर अत्यन्त अपवित्र नरक में गिरते हैं ॥२५॥
इस प्रकार पण्डित शिवदत्तमिश्रशास्त्रिकृत 'शिवदत्ती' भाषाटीका में पाराशरीय
धर्मशास्त्र में पाँचवाँ अध्याय समाप्त ॥ ५ ॥
६. षष्ठोऽध्यायः
अतः परं प्रवक्ष्यामि प्राणहत्यासु निष्कृतिम् ।
पराशरेण पूर्वोक्तां मन्वर्थेऽपि च विस्तृताम् ॥ १ ॥
अशौच प्रकरण के अनन्तर अब मैं प्राणहत्या का प्रायश्चित्त कहता
हूँ, जिसे महर्षि पराशर ने पहले ही कहा है तथा मन्वादि स्मृतियों में
भी विस्तारपूर्वक वर्णित है ॥१॥
क्रौञ्च-सारस-हंसांश्च चक्रवाकं च कुक्कुटम् ।
जालपादं च शरभं हत्वाऽहोरात्रतः शुचिः ॥ २ ॥
क्रौंच, सारस, हंस, चक्रवाक, मुर्ग, बत्तक तथा शरभ इनमें से किसी
की हत्या करने से पुरुष एक दिन-रात का उपवास कर शुद्ध
होता है ॥२॥