Skip to content
SarvaKosh
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

by महर्षि पराशर

Source: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (origin)

DevanagariSanskritpublished170 pages

Page 56 of 170

Read in context
Page 56

CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri
४४ पाराशरस्मृतिः [ पञ्चमो-
जो स्त्री अपने पति के मर जाने पर ब्रह्मचर्य का पालन करती हुई
अपने दिन को बिताती है वह मरने पर ब्रह्मचारियों की भाँति स्वर्ग
को जाती है ॥३१॥
तिस्रः कोट्योऽर्द्धकोटी च यानि लोमानि मानुषे ।
तावत्कालं वसेत् स्वर्गे भर्तारं याऽनुगच्छति ॥३२॥
जो स्त्री अपने पति के मर जाने पर उसके साथ ही प्राण त्यागकर
पातिव्रत्य धर्म का पालन करती है वह मनुष्य शरोर में रहनेवाले
साढ़े तीन करोड़ रोयें के बराबर उतने हो वर्ष तक स्वर्ग में वास
करती है ॥३२॥
व्यालग्राही यथा व्यालं बलादुद्धरते बिलात् ।
एवं स्त्री पतिमुद्धृत्य तेनैव सह मोदते ॥३३॥
इति पाराशरीये धर्मशास्त्रे उद्बन्धनादिमृतशुद्धिर्नाम
चतुर्थोऽध्यायः ॥ ४ ॥
जिस प्रकार सपेरा साँप को उसके बिल से बलात् निकाल लेता
है उसी प्रकार पतिव्रता स्त्री भी अपने तप के प्रभाव से लोकान्तर में
गये हुए अपने पति को खोजकर उसके साथ विहार करती है ॥३३॥
इस प्रकार 'शिवदत्ती' भाषाटीका में, पाराशरीय धर्मशास्त्र में उद्बन्धनादिमृतशुद्धि
नामक चतुर्थ अध्याय समाप्त ॥ ४ ॥
•
५. पञ्चमोऽध्यायः
वृक-श्वान-शृगालाद्यैर्दष्टो यस्तु द्विजोत्तमः ।
स्नात्वा जपेत् स गायत्रीं पवित्रां वेदमातरम् ॥ १ ॥
Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal