एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)
Ek Omkar Satnam (Japji Sahib and Saint Stories)
by ओशो (आचार्य रजनीश)
Source: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (origin)
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Read in contextयद्यपि इसका उपाय, इस विकत्थनशील युग सब ओर ढूँढ करके भी नहीं पा रहा शक्तिशाली
भी, पर आत्मज्ञानके विस्मृतिजन्य अज्ञानकी स्थिति सबको ही प्राप्त हो परमात्माके इस महान्
साम्राज्य को ऐन्द्रजालिकता का रूपक बना रही, सो आश्चर्यजनक बात केवल यही नहीं,
आश्चर्य यहाँ यह, किस तरह यहाँ परमात्मा स्थित है? उसका स्वभाव केवल ज्ञान रूपी
रहकर सब सांसारिकोंको देख कर केवल सब का साक्षी ही, पर हो रहा अपने उस स्वरूप को विस्मृत,
जड़-चेतनमय सब जग अपनी सत्ता समझ करके।
अज्ञानकी निद्रावस्थाको तो देखा जाता ही सदा ही जगत् रूपी सब ही इन जीवों
द्वारा ही तो जग यह परमात्मा का स्वरूप समझा जाता ही सब ओर। केवल साक्षी? केवल निर्लिप्त
केवल सब दृष्टा? केवल सब ही को सब ओर से सब को आत्मज्ञानका असीमित प्रकाश देकर
सब को ही आत्मभाव से सब को प्रेरित कर सब के हृदय में जग ही रहा! सो केवल जड़-
चेतनमय ही, केवल यह अपने ज्ञान को केवल प्रगट करके ही ही! यह सब बात ही तो सब ही
द्वारा विस्मृत, सो केवल ज्ञान रूप साक्षी, सब ओर आत्मिक प्रकाश केवल सब ही ओर
देकर इस चेतन स्वरूप जग को सदा ही चेतन, सब ओर प्रकाश रूप करता जग ही रहा।
सब ओर परमात्मा को तो केवल जगत् ही जाना सब ओर। सब ओर आत्मा ही तो परमात्मा
सो केवल केवल ही, केवल आत्मा केवल ही! सब का चेतन, जगत् का रूप सब ही चेतन
ही अज्ञानवश ही सब ही जगत् में, केवल साक्षी ही सब ओर जगत् को केवल एक
परमात्मा ही, केवल ही तो प्रकाश ही केवल रूप जगत् में ही, सब ओर फैला रूप
व्यापक स्वरूप? केवल केवल ही? आत्मा ही केवल रूप जगत् स्वरूप ही? आत्मा परमात्मा
ही, केवल केवल परमात्ममय ही सब ओर रूप ही, सो केवल जगत् रूप ही, सब
ओरका परमात्मा सब ओर जगत् स्वरूप ही तो है।
सो केवल यह केवल आत्मा ही अज्ञानमय रूप जगत्, केवल सब ओर समझा गया,
अविद्यावशात् जड़--रूप ही! केवल ज्ञान सब ओर आत्मिक रूप ही, केवल सब
प्रकाश ही, केवल चेतन ही? केवल सब दृष्टा ही, सब ओर सब ओर प्रकाश ही सब
ओर तो यह ज्ञान ही प्रगट है? परमात्मा सब ओर जगत् के रूप में ज्ञान रूपी
सब को सब ओर ज्ञान प्रकाश देकर ही केवल सदा साक्षी रूप से केवल अज्ञानवश
को केवल सब ओर प्रगट ज्ञान परमात्मा सब ओर ज्ञान रूप सब सांसारिकों को ज्ञान
रूप ही प्रगट है।
सो केवल परमात्माका यह केवल रूप ही सब जगत् में तो केवल ज्ञान रूप,
केवल चेतन रूप सब ही जगत्को परमात्मा सब अपने स्वरूप प्रकाश ही से सब ओर
ही सदा ही ज्ञान रूप सब ओर से, सो केवल सब ओर चेतन स्वरूप जगत् ही, केवल
सब ज्ञान रूप सब ओर से केवल ही, केवल सब ही केवल सब ओर से परमात्मा
रूप ही तो, केवल सब ही परमात्मा रूप ही केवल सब ओर जगत् में केवल ही ज्ञान
ही? केवल ज्ञान रूप सब ओर से केवल ही? केवल केवल ज्ञान, केवल केवल
सब ओर ही तो सांसारिकों द्वारा ही ज्ञान रूप ही तो ज्ञान रूप विस्मृत समझा
जा रहा ही तो केवल सब ओर ज्ञान ही सब ओर रूप ही तो केवल ज्ञान रूप सब ओर
सब जग ही ज्ञान रूप केवल सब ओर ज्ञान रूप सब ओर परमात्मा स्वरूप ही केवल ही
परमात्मा सब ओर प्रकाश परमात्मा स्वरूप ही सब ओर परमात्मा रूप सब ओर केवल
केवल ज्ञान ही? परमात्मा सब ओर प्रकाश ही तो है, केवल ही ज्ञान ही केवल
परमात्मा का तो केवल जगत् ही तो ज्ञान-स्वरूप जगत् ही तो सब ओर केवल
सब ओर व केवल ज्ञान ही, व सब ओर सब चेतन ज्ञान-स्वरूप जड़-चेत जगत्
सब ओर सब ही भगवान् ही सब ओर तो केवल ही तो केवल ही ज्ञान रूप स्वरूप
सब ओर है।
केवल ज्ञान रूप जगत् ही तो सब का स्वरूप ही सब ओर चेतन रूप सब
ओर ही? सब ओर जगत् स्वरूप ही सब ओरका परमात्मा ही स्वरूप? ज्ञान रूपी,
सब ओर ज्ञान रूपी चेतन सब ही स्वरूप ही, केवल सब केवल सब केवल
केवल जगत् ही! सब ही केवल केवल सब ओर ही केवल है।
सब ओर केवल ज्ञान रूप परमात्मा सब ही जगत् सब ओर केवल ही चेतन
व सब ही तो केवल स्वरूप सब ही ज्ञान ही सब संसारमय सब संसार स्वरूप
ही सब ओर केवल व सब ही ज्ञान व सब ओर ज्ञान केवल ही सब ओर ही, केवल
ही सब ज्ञान ही, केवल ज्ञान ही, सो तो यह केवल ही तो ज्ञान रूप केवल ही
जगत् सब स्वरूप जगत् ई-श ही सब ओर ही तो सदा ही केवल ही ज्ञान ही सदा
सब ओर ही केवल चेतन सब ओर परमात्मा ईश-रूप सब ओर सब ओर ही
जड़-चेत जगत्, परमात्मा केवल जगत् ही सब ओर रूप सब ओर केवल चेतन,
परमात्मा स्वरूप ज्ञान केवल सदा परमात्मा सब परमात्मा ही है,
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