Skip to content
SarvaKosh
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

Ek Omkar Satnam (Japji Sahib and Saint Stories)

by ओशो (आचार्य रजनीश)

Source: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (origin)

DevanagariHindipublished322 pages

Page 233 of 322

Read in context
Page 233

यद्यपि इस वर्ष एक नये सज्जन उपस्थित हुए परंतु कार्यकारिणी केवल एक बार
मिली।
"साधरण सभा का यह मत था वर्तमान मंडल को धन, सम्पत्ति, सामग्री, पुस्तकें
और पत्र संग्रह-की सब की सब वस्तु सुपुर्द कीजाए"
पर "सब का सब सुपुर्द हो", इस बात विचार ही नहीं हो सकता था, ना कोई कोष,
ना पुस्तक थी, ना पत्रिका थी, केवल एक दो सौ पृष्ठ एक रजिस्टर केवल था जो सब १
विषय था, यह पत्रव्यवहार जिस का प्रत्येक पत्र अलग पत्र पर नहीं हो सकता था, पर
कार्यकारिणी केवल एक ही विषय पर, केवल एक विषय पर बहस करने नियत थी।
केवल कार्यकारिणी सदस्य ही, व प्रधान जी, कार्यकारिणी केवल बात का ध्यास था कि
सब विषय संक्षेप रूप सब सम्मुख रखे जाएं सो, केवल किसी प्रकार नवीन रूपया इकट्ठा
किया जाय इस बात पर विचार नहिं था, केवल कार्यकारिणी विचार केवल नवीन रूपया,
केवल इसी बात पर सब का आकर्षण किया जाय सो, केवल कार्यकारिणी सदस्य,
केवल इस बात पर ध्यान लगा रहा, केवल इसी विषय केवल ध्यान, इस प्रकार
सभा, केवल एक बार
इस प्रकार से कार्यकारिणी समाप्त हुई, पर क्या किसी अन्य प्रकार से? या विचार ही
सब का इस प्रकार विचार करने का ही विचार करने का विचार सब किया जाय, केवल १
विषय पर केवल ही विचार हो सकता है? सब प्रकार से सब ही? सब प्रकार से केवल ही,
सब ही? सब सम्प्रदाय ही ना, सब नवीन रूप? सब प्रकार से ही सम्प्रदाय रूप? सब
प्रकार ही रूपया धन, नवीन रूप? सब प्रकार से ही सब नवीन रूपया धन? सब
प्रकार ही सब नवीन रूपया धन? इस प्रकार से ना व सब?
केवल कार्यकारिणी इस वर्ष के समाप्त करने तक सब एक मत सब विषय
प्रकार सब सम्मुख रखा जाय सो, केवल सब एक मत सब विषय उपस्थित कर सब सम्मुख
कार्यकारिणी पर रख दिए।
केवल इतना किया गया कि यह निश्चय किया गया कि सब यह कार्यकारणी का सम्मुख
सब पत्र-संग्रह का सब की सब वस्तु सुपुर्द
कीजाय केवल कार्यकारिणी
सब नवीन रूपया एकत्रित एकत्रित कर सब सब उपस्थिति
का भेजा जाय।
233