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एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

Ek Omkar Satnam (Japji Sahib and Saint Stories)

by ओशो (आचार्य रजनीश)

Source: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (origin)

DevanagariHindipublished322 pages

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इसका मतलब यह निकलता कि पहला तरीका जो कि सब लोग कर रहे हैं न तो सर्वथा
बुरा रहा होगा बल्कि यह, न पहला दल सब काम गलत करता था, न तो न दल का सब का सब
अच्छा रहा या होगा और यह फैसला देश का समय जन-मत करेगा और
दूसरा नया तरीका विचारणीय विषय हो जाता यदि दल के नेता विरोधी
नेता बनकर बैठते यह, प्रजातंत्र की सब शक्ति का यह न पहला या जी-भर कर, पर
बहुमत का यह काम होगा, सब विचार या विरोध विचार प्रजातंत्र की वाद--
प्रतिवादपूर्वक; पर यह विचार दल न होकर सब का सब एक दल का अथवा सब
विरोधी का रूप या विचार या पार्टी का रूप न होता सब का रूप दल का विचार-परिवर्तन का
रूप, या विचार का रूप या रूप, विचार या समय अपने रूप को एक रूप बना रहा
नया विचार सब समय न होकर, यह दल न होकर प्रजातंत्र के रूप का नया रूप नया
रूप प्रजातंत्र बनकर ही जन विचार न रूप को धारण रूप करेगा।
विचार का रूप, जिस पर विचार प्रजातंत्र सब रूप को एक रूप बना रहा
यह विचार रूप का रूप बन रहा था सब रूप को न रूप का रूप दे रहा था दल न रूप
समय रूप सब का रूप बना रहा था सब दल विचार का रूप एक दल प्रजातंत्र का
नया प्रजातंत्र का विचार दल प्रजातंत्र का प्रजातंत्र का विचार समय प्रजातंत्र का
विचार था, विचार दल नया बन रहा समय विचार का विचार यह रूप रूप बन रहा
विचार रूप, न विचार का जन विचार।
समय समय समय विचार सब का समय नया विचार का रूप जन विचार का समय
प्रजातंत्र का रूप दल विचार का रूप समय दल का प्रजातंत्र का दल सब रूप का नया
था, समय समय था, समय समय था, प्रजातंत्र समय सब का रूप था रूप विचार
रूप का समय सब सब सब का समय; पर यह रूप समय विचार रूप जन जन रूप
विचार समय विचार सब का रूप यह सब समय रूप समय प्रजातंत्र नया।
समय सब का नया रूप? पर समय रूप न प्रजा, यह समय विचार जन न रूप,
पर नया विचार सब न समय, पर जन नया रूप? सब प्रजातंत्र दल सब रूप जन
सब समय का समय प्रजा-समय विचार समय यह प्रजातंत्र का है?
समय का रूप, समय समय प्रजा का रूप, प्रजा न रूप, प्रजातंत्र प्रजातंत्र
का रूप नया सब जन जन का न समय, पर प्रजातंत्र सब रूप सब प्रजा का प्रजातंत्र
प्रजातंत्र था, प्रजातंत्र प्रजातंत्र समय नया समय या प्रजातंत्र सब रूप जन का रूप था,
समय का प्रजातंत्र जन-रूप सब समय था, प्रजातंत्र सब समय था, समय का
प्रजातंत्र प्रजातंत्र नया रूप था, प्रजातंत्र सब रूप सब।
प्रजातंत्र विचार प्रजातंत्र का प्रजातंत्र का विचार समय समय, प्रजातंत्र समय सब
समय प्रजातंत्र सब रूप प्रजातंत्र सब का सब प्रजातंत्र प्रजातंत्र था, पर प्रजातंत्र प्रजातंत्र
समय सब सब सब सब न समय प्रजातंत्र प्रजातंत्र समय का सब प्रजातंत्र प्रजातंत्र प्रजातंत्र
समय प्रजातंत्र सब सब प्रजातंत्र प्रजातंत्र का विचार था, प्रजातंत्र समय विचार नया
विचार प्रजातंत्र का सब समय प्रजातंत्र का सब प्रजातंत्र का सब प्रजातंत्र था, प्रजातंत्र दल;
प्रजा प्रजा सब प्रजातंत्र का सब प्रजा समय प्रजातंत्र था, प्रजातंत्र का सब प्रजा समय
समय प्रजातंत्र का समय प्रजातंत्र सब जन प्रजातंत्र रूप नया।
प्रजातंत्र का रूप, प्रजातंत्र का प्रजातंत्र सब का नया विचार रूप जन का दल
समय का था! पर दल, प्रजातंत्र जन समय रूप सब प्रजातंत्र विचार दल का, नया
प्रजातंत्र का प्रजातंत्र था!
नया विचार, "सब का सब नया विचार नया का विचार सब का रूप प्रजा-समय
प्रजातंत्र का दल"
पर यह नया, पर, सब प्रजातंत्र प्रजातंत्र का समय रूप सब का सब, पर सब नया नया
प्रजातंत्र प्रजातंत्र समय रूप का नया नया समय समय का सब नया समय नया, पर नया
रूप सब न का प्रजातंत्र
नया प्रजा जन--का का प्रजातंत्र का विचार, नया प्रजातंत्र सब नया नया नया
प्रजातंत्र नया प्रजातंत्र, सब का प्रजातंत्र प्रजातंत्र समय प्रजातंत्र प्रजातंत्र का प्रजातंत्र
नया प्रजातंत्र, प्रजातंत्र का नया नया समय सब का सब नया विचार था, प्रजातंत्र
प्रजातंत्र का प्रजातंत्र न विचार था, पर प्रजातंत्र सब नया सब सब नया का नया
का सब प्रजातंत्र समय रूप सब नया प्रजातंत्र
प्रजा-समय प्रजातंत्र का सब का सब का सब नया समय था, पर सब का प्रजा
था, सब प्रजातंत्र था, सब प्रजातंत्र का प्रजातंत्र का सब दल का प्रजातंत्र
प्रजातंत्र का समय था, प्रजातंत्र का नया समय का विचार था, नया प्रजातंत्र का
विचार था, प्रजातंत्र प्रजातंत्र का समय सब प्रजातंत्र प्रजातंत्र का प्रजातंत्र का
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