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संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

by महर्षि व्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

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DevanagariSanskritpublished318 pages

Page 315 of 318

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Page 315

संक्षिप्त श्रीवराहपुराण (कोड 1361) ग्रन्थाकार— इस पुराणमें भगवान् श्रीहरिके वराह-अवतारकी मुख्य
कथाके साथ-साथ अनेक तीर्थ, व्रत, यज्ञ, दान आदिका विस्तृत वर्णन किया गया है। सचित्र, सजिल्द।
संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण (कोड 631) ग्रन्थाकार— इस पुराणमें चार खण्ड हैं—ब्रह्मखण्ड, प्रकृतिखण्ड,
श्रीकृष्णजन्मखण्ड और गणेशखण्ड। इसमें भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाओंका विस्तृत वर्णन, अनेक रोचक एवं
रहस्यमयी कथाएँ, श्रीराधाकी गोलोक-लीला तथा अवतार-लीलाका सुन्दर विवेचन किया गया है। सचित्र, सजिल्द।
वामनपुराण, अनुवादसहित (कोड 1432) ग्रन्थाकार— यह पुराण मुख्यरूपसे त्रिविक्रम भगवान् विष्णुके
दिव्य माहात्म्यका व्याख्याता है। इसमें भगवान् वामन, नर-नारायण, भगवती दुर्गाके उत्तम चरित्रके साथ-साथ
भक्त प्रह्लाद तथा श्रीदामा आदि भक्तोंके बड़े रम्य आख्यान हैं। सचित्र, सजिल्द।
अग्निपुराण, केवल हिन्दी-अनुवाद (कोड 1362) ग्रन्थाकार— इसमें परा-अपरा विद्याओंका वर्णन, महाभारतके
सभी पर्वोंकी संक्षिप्त कथा, रामायणकी संक्षिप्त कथा, मत्स्य, कूर्म आदि अवतारोंकी कथाएँ, वास्तु-पूजा, विभिन्न
देवताओंके मन्त्र आदि अनेक उपयोगी विषयोंका अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है। सचित्र, सजिल्द।
मत्स्यमहापुराण, अनुवादसहित (कोड 557)— यह पुराण मत्स्यावतारके रूपमें भगवान् विष्णुकी
लीलाओंका सुन्दर परिचायक है। इसमें मत्स्यावतारकी कथा, सृष्टि-वर्णन, मन्वन्तर तथा पितृवंश-वर्णन, ययाति-
चरित्र, राजनीति, यात्राकाल, स्वप्नशास्त्र, शकुन-शास्त्र आदि अनेक विषयोंका सरल वर्णन किया गया है। इस
पुराणका पठन-पाठन आयुकी वृद्धि करनेवाला, कीर्तिवर्धक तथा पापोंका नाशक है। सचित्र, सजिल्द।
कूर्मपुराण, अनुवादसहित (कोड 1131)— इस पुराणमें भगवान्‌के कूर्मावतारकी कथाके साथ-साथ सृष्टि
वर्णन, वर्ण, आश्रम और उनके कर्तव्यका वर्णन, युगधर्म, मोक्षके साधन, तीर्थ-माहात्म्य, २८ व्यासोंकी कथाएँ,
ईश्वर-गीता, व्यास-गीता आदि विविध विषयोंका अत्यन्त सुन्दर प्रतिपादन किया गया है। विभिन्न कथाओं एवं
रोचक उपाख्यानोंके द्वारा इसमें ज्ञान और भक्तिकी सरस व्याख्या की गयी है। विभिन्न दृष्टियोंसे इस पुराणका
पठन-पाठन सबके लिये कल्याणकारी है। सचित्र, सजिल्द।
संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत-मोटा टाइप (कोड 1133) ग्रन्थाकार— यह पुराण परम पवित्र वेदकी
प्रसिद्ध श्रुतियोंके अर्थसे अनुमोदित, अखिल शास्त्रोंके रहस्यका स्रोत तथा आगमोंमें अपना प्रसिद्ध स्थान
रखता है। यह सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, वंशानुकीर्ति, मन्वन्तर आदि पाँचों लक्षणोंसे पूर्ण है। पराम्बा भगवतीके पवित्र
आख्यानोंसे युक्त इस पुराणका पठन-पाठन तथा अनुष्ठान भक्तोंके त्रितापोंका शमन करनेवाला तथा सिद्धियोंका
प्रदाता है। सचित्र, सजिल्द (कोड 1326) गुजराती, (कोड 1897, 1898) सटीक।
नरसिंहपुराणम् (कोड 1113) ग्रन्थाकार— इस पुराणमें दशावतारकी कथाएँ एवं सात काण्डोंमें भगवान्
श्रीरामके पावन चरित्रके साथ-साथ सदाचार, राजनीति, वर्णधर्म, आश्रम-धर्म, योग-साधना आदिका सुन्दर विवेचन
किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें भगवान् नरसिंहकी विस्तृत महिमा, अनेक कल्याणप्रद उपाख्यानोंका वर्णन,
भौगोलिक वर्णन, सूर्य-चन्द्रादिसे उत्पन्न राजवंशोंका वर्णन तथा अनेक स्तुतियोंका उल्लेख है। सचित्र, सजिल्द।
महाभारत-खिलभाग हरिवंशपुराण (कोड 38) ग्रन्थाकार— हरिवंशपुराण वेदार्थ-प्रकाशक महाभारत
ग्रन्थका अन्तिम पर्व है। पुत्र-प्राप्तिकी कामनासे हरिवंशपुराणके श्रवणकी परम्परा भारतवर्षमें चिरकालसे
प्रचलित है। अनन्त भावुक धर्मपरायण लोग इसके श्रवणसे पुत्र-प्राप्तिका लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भगवद्भक्ति
तथा प्रेरणादायी कथानकोंकी दृष्टिसे भी इसका बड़ा महत्त्व है। भगवान् श्रीकृष्णसे सम्बन्धित अगणित
कथाएँ इसमें ऐसी हैं, जो अन्यत्र दुर्लभ हैं। धार्मिक जन-सामान्यके कल्याणार्थ इसके अन्तमें सन्तानगोपाल-
मन्त्र, अनुष्ठान-विधि, सन्तान-गोपाल-यन्त्र तथा संतान-गोपालस्तोत्र भी संगृहीत हैं। सचित्र, सजिल्द। (कोड 1589)
केवल हिन्दीमें भी।
महाभागवत [ देवीपुराण ], अनुवादसहित (कोड 1610) ग्रन्थाकार— इस पुराणमें मुख्य रूपसे भगवती
महाशक्तिके माहात्म्य एवं उनके विभिन्न चरित्रोंका विस्तृत वर्णन है। इसमें मूल प्रकृति भगवतीके गङ्गा,
पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, तुलसी आदि रूपोंमें विवर्तित होनेके मनोरम आख्यान हैं। सचित्र, सजिल्द।