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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 254 of 304

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Page 254
  1. प्रकीर्णक
    प्रकीर्णके पुनर्ज्ञेयो व्यवहारो नृपाश्रयः।
    राज्ञामाज्ञाप्रतीघातस्तत् कर्म करणं तथा ॥ 1 ॥
    प्रकीर्णक प्रकरण में राजा द्वारा किये जाने वाले व्यवहारों से सम्बन्धित विषयों
    का विवेचन है। इसी के साथ राजा की आज्ञा के प्रतिपालन और उसके उल्लंघन के
    परिणाम पर भी विचार किया गया है।
    पुरप्रदानं सम्भेदः प्रकृतीनां तथैव च।
    पाषण्डनैगमश्रेणीगणधर्मविपर्ययः ॥ 2 ॥
    पितापुत्रविवादश्च प्रायश्चित्तव्यतिक्रमः।
    प्रतिग्रहविलोपश्च कोप आश्रमिणामपि ॥ 3 ॥
    वर्णसंकरदोषश्च तद्वृत्तिनियमस्तथा।
    न दृष्टं यच्च पूर्वेषु ततसर्वं स्यात् प्रकीर्णके ॥ 4 ॥
    पूर्व प्रकरणों में अचर्चित निम्नोक्त विषयों पर प्रस्तुत प्रकीर्णक प्रकरण में
    विचार किया जा रहा है—
  2. उपनगर (कालोनी) के निर्माण के लिए राजाज्ञा तथा राजकीय आर्थिक
    अनुदान।
  3. प्रजाजनों का (आर्थिक, वर्ण-गत, जाति-गत, धर्म-गत, सम्प्रदाय-गत
    तथा व्यवसाय-गत आदि) विभिन्न आधारों पर विभागीकरण।
  4. वेद-विरुद्ध सम्प्रदायों—पाखण्ड, नैगम, श्रेणी और गण आदि—के सम्बन्ध
    में दृष्टिकोण और व्यवहार-नियम आदि।
  5. पिता-पुत्र के मध्य उत्पन्न विवाद और उसका निपटारा।
  6. प्रायश्चित्त के उल्लंघन का दण्ड।
  7. आश्रमवासियों को दी जाने वाली सुविधाओं को प्रतिबन्धित करना, स्वीकृत
    अनुदान का प्रत्यावर्तन (रोक लगाना) तथा उनके विरुद्ध कार्यवाही करना।
  8. वर्णसंकरों द्वारा नियम, मर्यादा का अतिक्रमण तथा
  9. वर्णसंकरों की वृत्ति के स्रोत आदि।
    इन विषयों पर पहले चर्चा नहीं की जा सकी, परन्तु इससे इन विषयों का
    252 / नारदस्मृति