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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 238 of 304

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Page 238
  1. साहस
    सहसा क्रियते कर्म यत्किञ्चिद्बलदर्पितैः।
    तत् साहसमिति प्रोक्तं सहो बलमिहोच्यते ॥ 1 ॥
    अपने बल और अहंकार के आधार पर बलवान् एवं उद्धत व्यक्तियों द्वारा
    किये जाने वाले—दूसरों का सर्वस्व हरण, चोरी, डाका, लूट, मार, हत्या, अपमान
    तथा स्त्रियों के शील भंग आदि—निन्दनीय कार्य 'साहस' कहलाते हैं। साहस
    शब्द में सह का अर्थ बल है। इस प्रकार जिस कार्य में बल का अनुचित प्रयोग
    किया जाता है, वह साहस कहलाता है।
    मनुष्यमारणं स्तेयं परदाराभिमर्शनम्।
    पारुष्यं द्विविधं ज्ञेयं साहसं च चतुर्विधम्॥ 2 ॥
    साहस पांच प्रकार का होता है—1. मनुष्यों की हत्या कर देना, 2. मनुष्यों
    की धन सम्पत्ति को चुराना अथवा उनसे छीन लेना, 3. दूसरे की स्त्री का शील
    भंग करना, 4. दूसरों की पिटाई करना तथा 5. दूसरों को गाली-गलौच देना और
    उन्हें अपमानित करना।
    टिप्पणी—आजकल साहस का एक अन्य रूप सामने आया है—धन के
    लिए किसी धनी व्यक्ति का अथवा उसके बेटे-बेटी का अपहरण करके उसे
    बन्धक बना लेना।
    तत् पुनस्त्रिविधं ज्ञेयं प्रथमं मध्यमं तथा।
    उत्तमं चेति शास्त्रेषु तस्योक्तं लक्षणं पृथक् ॥ 3 ॥
    अपनी उग्रता की दृष्टि से साहस तीन प्रकार का होता है—प्रथम, मध्यम और
    उत्तम। मनुस्मृति आदि ग्रन्थों में इन तीनों के पृथक्-पृथक् लक्षण दिये हुए हैं।
    फलमूलोदकादीनां क्षेत्रोपकरणस्य च।
    भङ्गाक्षेपावमर्दाद्यैः प्रथमं साहसं स्मृतम्॥ 4 ॥
    फलों वाले वृक्षों से भरे उपवनों, मूली गाजर, शलगम, आलू, शकरकन्दी
    आदि साग सब्जियों को उगाने वाले खेतों तथा जल-स्रोतों—नदी-नालों—का
    उजाड़ना, रौंदना, इन स्थानों पर कार्य करने वालों को आतंकित करके इन स्थानों
    को उपजहीन बनाना तथा उपज को चुराना, जबरदस्ती छीनना आदि प्रथम स्तर का
    साहस कहलाता है।
    236 / नारदस्मृति