नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
Page 151 of 304
Read in contextसामान को लौटाता है, तो परिवारजनों को उसका सौजन्य मानकर उसके प्रति
आभार प्रकट करना चाहिए। उसके प्रति कुछ रख लेने का किसी प्रकार का कोई
सन्देह भी नहीं लाना चाहिए, अपितु उस पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। उस पर
किसी प्रकार का न तो कोई आरोप लगाया जा सकता है और न ही उसके विरुद्ध
अभियोग चलाया जा सकता है।
अच्छलेनैव चान्विच्छेत्तमर्थं प्रीतिपूर्वकम्।
विचार्य तस्य वा वृत्तं साम्नैव परिशोधयेत् ॥ 11 ॥
निक्षेप्ता के निक्षेप की वस्तु को वापस लिये बिना अचानक मर जाने पर और
गृहीता द्वारा लौटाने से इनकार करने पर मृतक के उत्तराधिकारियों को बिना किसी
छल कपट का सहारा लिये प्रेम-पूर्वक उसे समझाने-बुझाने का प्रयास करना
चाहिए अथवा ग्रहीता के आचरण के अनुरूप साम-दान आदि किसी भी उपयुक्त
लगने वाले उपाय का यथेष्ट प्रयोग करना चाहिए।
उत्तराधिकारियों को यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि उनके पास निक्षेप
का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं होता। जानकारी के निश्चित होने पर भी प्रमाण के
अभाव में ग्रहीता को न्यायालय में तो नहीं घसीटा जा सकता। अतः प्रेम से कार्य
निकालने में ही बुद्धिमत्ता होती है।
चौरैर्हृतं जले मग्नमग्निना दग्धमेव च।
न दद्यात् यदि तस्मात् स न संहरति किञ्चन ॥ 12 ॥
निक्षेप्ता की निक्षिप्त वस्तु के साथ ही अन्य छल-कपट का सहारा न लेने वाले
ग्रहीता के घर से सामान चोरी हो जाने पर, बाढ़ से बह जाने पर, आग लगने से जल
जाने पर निक्षेप्ता को अपनी निक्षिप्त वस्तु की मांग नहीं करनी चाहिए। हां, यह
अवश्य निश्चित करना चाहिए कि निक्षेप्ता का सामान सचमुच नष्ट हो गया है
अथवा उस सामान के बच जाने पर ग्रहीता की नीयत बिगड़ गयी है। ग्रहीता
दुर्घटना की आड़ में कहीं निक्षेप्ता के सामान को हड़पने तो नहीं जा रहा है।
यो निक्षेपं नार्पयति यश्चानिक्षिप्य याचते।
तावुभौ चौरवच्छास्यौ दण्डं दाप्यौ च तत्समम् ॥ 13 ॥
दोनों-निक्षेप को न लौटाने वाले तथा निक्षेप न रखकर भी उसकी मांग
करने वाले, अर्थात् झूठ बोलकर दूसरे को लूटने को प्रयत्नशील-को चोर समझना
चाहिए और दोनों को चोर के लिए निर्धारित दण्ड देकर उन्हें अनुशासित करना चाहिए।
एष एव विधिर्दृष्टो याचितान्वाहितादिषु।
शिल्पे चोपनिधौ न्यासे प्रतिन्यासे तथैव च ॥ 14 ॥
निम्नोक्त सामान के सम्बन्ध में भी निक्षेप के विषय में निर्दिष्ट नियम लागू होते
हैं-
नारदस्मृति / 149