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नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

by देवर्षि नारद

Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished304 pages

Page 133 of 304

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पिटिका में शिला के स्थान पर उसी भार की ईंटें, मिट्टी का ढेला अथवा राख आदि
को भी रखा जा सकता है।
प्रथमारोपणे ग्राह्यं प्रमाणं निपुणैः सह।
तुलाशिलाभ्यां तुल्यं च तोरणं न्यस्तलक्षणम् ॥ 273 ॥
पहली बार जब शिला अथवा ईंटों के भार के साथ पुरुष के भार की तुलना
की जाती है, तो भार की जांच-परख में निपुण लोगों को वहां उपस्थित रहना
चाहिए और यदि तुला और शिला का भार बराबर हो, अर्थात् तराजू के दोनों पलड़े
समरूप हों, तो उस स्थिति को 'तोरण' का नाम देना चाहिए।
सुवर्णकारा वणिजः कुशलाः कांस्यकारकाः।
अवेक्षेरन् घटतुलां तुलाधारणकोविदाः ॥ 274 ॥
घट दिव्य के समय, तुला-धारण में विशिष्ट निपुणता प्राप्त स्वर्णकारों, कांस्यकारों,
व्यापारियों तथा व्यवसायियों को घट तुला के निरीक्षण और सत्यापन के लिए
निमन्त्रित ही नहीं करना चाहिए, अपितु उनकी उपस्थिति को सुनिश्चित भी करना
चाहिए।
तुलयित्वा नरं पूर्वं चिह्नं कृत्वा घटस्य च।
कक्षास्थाने यदा तुल्यमवतार्य ततो घटात् ॥ 275 ॥
प्रथम पुरुष को तोलते हुए तुला में उत्कीर्ण चिह्नों पर उसके भार को अंकित
कर देना चाहिए और पुनः व्यक्ति को तुला से उतार लेना चाहिए।
समयैः परिगृह्यार्थं पुरारोपयेन्नरम्।
निर्वाते वृष्टिरहिते शिरस्यारोप्य पत्रकम् ॥ 276 ॥
थोड़े समय के अन्तराल के पश्चात् पुरुष को फिर तुला पर चढ़ाना चाहिए
और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न तो वृष्टि होनी चाहिए और न ही पवन
आन्दोलित होना चाहिए; क्योंकि आंधी-वर्षा में तुला के पलड़ों का अविचल रहना
सम्भव नहीं होता। शान्त और निश्चल परिवेश में तोले जाने वाले व्यक्ति के सिर में
एक लिखित पत्र रख देना चाहिए। इस पत्र के रखने का अभिप्राय यह है कि
अभियुक्त अपने सिर पर किसी प्रकार का कोई भार रखकर कृत्रिम रूप से अपने
वजन को बढ़ा हुआ न दिखा सके।
तस्मिन्नेव समारूढे धृत्वा कक्षां द्विजो वदेत्।
धर्मपर्यायवचनैर्घट इत्यभिधीयते ॥ 277 ॥
घट (तुला के पलड़े) में समारूढ़ होने के उपरान्त सच्चा सिद्ध होने वाला
व्यक्ति लोक में धर्म के पर्यायवाची शब्द 'घट' नाम से अभिहित होता है।
टिप्पणी—जिस प्रकार आज मुसलमान हज-मक्का-तीर्थ यात्रा करने
के उपरान्त सम्मानसूचक 'हाजी' पदवी को धारण करता है, उसी प्रकार तुला-
नारदस्मृति / 131