नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
by देवर्षि नारद
Source: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (origin)
DevanagariSanskritpublished304 pages
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सुथरी एवं सीधी-सादी भाषा में लिखा गया हो, 2. जिसमें दो-दो अर्थ देने वाले
शब्दों का प्रयोग न किया गया हो, 3. जिसमें उलटा-पुलटा, घुमा-फिराकर कुछ न
कहा गया हो, 4. जिसमें प्रत्येक तथ्य को उसके महत्त्व के अनुरूप क्रम से उद्धृत
किया गया हो, 5. जिसमें देशाचार का अतिक्रमण न किया गया हो तथा 6. बन्धक
सम्बन्धी नियमों, लेन-देन की शर्तों, अवधि, ब्याज की दर आदि का यथावत् स्पष्ट
उल्लेख किया गया हो।
मत्ताभियुक्तस्त्रीबालबलात्कारकृतं च यत्।
तदप्रमाणं लिखितं भीतोपधिकृतं तथा॥ 137॥
निम्नोक्त व्यक्तियों द्वारा लिखे गये दस्तावेज़ को वैध नहीं माना जाता, अर्थात्
उसके आधार पर किये लेन देन को वैधानिक मान्यता कदापि नहीं मिलती।
- मत्त—मदिरा आदि मादक द्रव्यों के प्रभाव के अन्तर्गत अर्ध-मूर्च्छित
अथवा नष्ट विवेकशक्ति वाला व्यक्ति। - अभियुक्त—पहले से ही अभियोग में फंसा व्यक्ति। ऐसा व्यक्ति विवश
एवं किंकर्तव्यविमूढ़ होता है। - स्त्री—शिक्षा तथा अनुभव के अभाव के कारण।
- बालक—स्त्रियां तथा बालक उचित-अनुचित अथवा सही ग़लत के
निर्णय में समर्थ नहीं होते। - लोभ, भय, छल तथा बल—डरा धमकाकर, मार-पीटकर, लालच
देकर अथवा कपट (धोखे) से कराये गये अनुबन्ध विवशता का परिणाम होते हैं।
मृताः स्युः साक्षिणो यत्र धनिकर्णिकलेखकाः।
तदप्यपार्थं लिखितं न चेदाधिः स्थिराश्रयः ॥ 138 ॥
यदि कोई वस्तु बन्धक नहीं रखी गयी, केवल विश्वास के आधार पर लेन-
देन किया गया है और इस लेन-देन को लिखित रूप भी दे दिया गया है, परन्तु
ऋण का शोधन करने से पूर्व ऋणदाता की, ऋणकर्ता की और साक्षी या साक्षियों
की मृत्यु हो जाती है, तो लिखित प्रमाण स्वतः निरस्त हो जाता है, अर्थात् उसके
आधार पर ऋणदाता के वंशज ऋणकर्ता के वंशजों से पूर्वजों द्वारा दिये-लिये ऋण
को लौटाने की मांग नहीं कर सकते।
आधिस्तु द्विविधः प्रोक्तो जङ्गमः स्थावरस्तथा।
सिद्धिरत्रोभयस्यास्य भोगो यत्रास्ति नान्यथा ॥ 139 ॥
बन्धक रखी जाने वाली सम्पत्ति दो प्रकार की होती है— - अचल सम्पत्ति—भवन, धरती आदि तथा 2. चल सम्पत्ति—स्वर्णाभूषण,
पशु, स्त्री, धान्य तथा शस्त्रास्त्र आदि। वस्तुतः बन्धक सम्पत्ति वही मानी जाती है,
जब उसका उपभोग वस्तु के वास्तविक स्वामी के बदले ऋणदाता करता है।
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