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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

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DevanagariHindipublished770 pages

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Page 741

* उत्तरभाग *
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विदुराश्रममें जाकर त्रिग और त्रिभुवनेश्वरका पूजन करनेसे मनुष्य सुखी होता है। मङ्कणेश्वरका पूजन करके मानव उत्तम गति पाता है। त्रैपुर और त्रिलिङ्गकी पूजा करनेपर सब पापोंसे छुटकारा मिल जाता है। जो मनुष्य षण्डतीर्थमें जाकर स्नान करके सुवर्ण दान करता है, वह सब पापोंसे शुद्धचित्त हो भगवान् शिवके धाममें जाता है। त्रिलोचनमें स्नान करनेसे रुद्रलोककी प्राप्ति होती है। देविकामें उमानाथका पूजन करके श्रेष्ठ मानव मनोवाञ्छित कामनाओंको पाता और शरीरका अन्त होनेपर स्वर्गलोकमें जाता है। भृङ्गारकी पूजा करनेसे अभीष्ट फलकी प्राप्ति होती है। शूलस्थानमें वाल्मीकिको नमस्कार करके मनुष्य कवि होता है। तदनन्तर च्यवनादित्यका पूजन करके तीर्थसेवी पुरुष सम्पूर्ण भोगसामग्रियोंसे सम्पन्न होता है। च्यवनेश्वरके पूजनसे मानव भगवान् शिवका अनुचर होता है। प्रजापालेश्वरकी पूजासे धन-धान्यकी वृद्धि होती है। बालादित्यकी पूजा करनेवाला मनुष्य विद्वान् और धनवान् होता है। कुबेरस्थानमें स्नान करके मानव निश्चय ही निधि पाता है। ऋषितोया नदीमें जाकर वहाँ स्नान करनेसे मानव पवित्र हो ब्राह्मणको सुवर्ण दान करे तो सब पातकोंसे छूट जाता है। सङ्गालेश्वरकी पूजा करनेसे रुद्रलोकमें प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

तदनन्तर नारायणदेवकी पूजा करनेसे मनुष्य मोक्षका भागी होता है। तप्तकुण्डोदकमें स्नान करके मूलचण्डीश्वरकी पूजा करे। इससे समस्त पापोंसे मुक्त हुआ मानव मनोवाञ्छित वस्तुको पा लेता है। चतुर्मुख विनायककी पूजा करनेसे भी अभीष्ट वस्तुकी प्राप्ति होती है। क्षेमादित्यके पूजनसे मनुष्य क्षेमयुक्त, सफलमनोरथ तथा सत्यका भागी होता है। रुक्मिणी देवीकी पूजा की जाय तो वे मनुष्योंको अभीष्ट वस्तु देती हैं। दुर्वासेश्वर और पिङ्गेश्वरकी पूजा करनेसे मनुष्य पापमुक्त हो जाता है। भद्रासङ्गममें स्नान करके मनुष्य सैकड़ों कल्याणकी बातें देखता है। मोक्षतीर्थमें स्नान करके मानव भवसागरसे मुक्त हो जाता है। नारायणगृहमें जाकर मानव फिर कभी शोक नहीं करता। हुंकारतीर्थमें स्नान करनेवाला पुरुष गर्भवासका कष्ट नहीं पाता तथा चण्डीश्वरका पूजन करनेसे सब तीर्थोंका फल मिल जाता है। आशापूरनिवासी विघ्नेश्वरका पूजन करनेसे विघ्नकी प्राप्ति नहीं होती। कलाकुण्डमें स्नान करनेवाला मानव निस्संदेह मोक्षका भागी होता है। नारदेश्वरका पूजक भगवान् विष्णु और शङ्करका भक्त होता है। भल्लतीर्थमें स्नान करके मानव समस्त पापोंसे मुक्त हो जाता है और कर्दमालतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्यके समस्त पातक दूर हो जाते हैं। गुप्त सोमनाथका दर्शन करके मनुष्य फिर कभी शोकमें नहीं पड़ता। शृङ्गेश्वरका पूजन करनेवाला पुरुष दुःखोंसे पीड़ित नहीं होता। नारायणतीर्थमें स्नान करनेवाला मानव मोक्ष प्राप्त कर लेता है। मार्कण्डेयेश्वरके पूजनसे मनुष्य दीर्घायु होता है।