संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
by महर्षि वेदव्यास
Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)
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पुण्यात्मा पुरुषोंको जलके भीतरसे ज्योति निकलती दिखायी देती है, जिसे देखकर मनुष्य फिर गर्भवासमें नहीं आता।
वहाँसे नैर्ऋत्य कोणमें पाँच धाराएँ नीचे गिरती हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं—प्रभास, पुष्कर, गया, नैमिषारण्य और कुरुक्षेत्र। उनमें पृथक्-पृथक् स्नान करके मनुष्य उन-उन तीर्थोंका फल पाता है। उसके बाद एक दूसरा विमलतीर्थ है, जो सोमकुण्डके नामसे भी विख्यात है, जहाँ तीव्र तपस्या करके सोम ग्रह आदिके अधीश्वर हुए हैं। भद्रे! वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य दोषरहित हो जाता है। वहाँ एक दूसरा द्वादशादित्य नामक तीर्थ है, जो सब पापोंको हर लेनेवाला और उत्तम है। वहाँ स्नान करके मनुष्य सूर्यके समान तेजस्वी होता है। वहीं 'चतुःस्रोत' नामका एक दूसरा तीर्थ है, जिसमें डुबकी लगानेवाला मानव धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चारोंमेंसे जिसको चाहता है, उसीको पा लेता है। सती मोहिनी! तदनन्तर वहीं सप्तपद नामक मनोहर तीर्थ है, जिसके दर्शनमात्रसे बड़े-बड़े पातक भी अवश्य नष्ट हो जाते हैं। फिर उसमें स्नान करनेकी तो बात ही क्या! उस कुण्डके तीनों कोणोंपर ब्रह्मा, विष्णु और महेश स्थित रहते हैं। वहाँ मृत्यु होनेसे मनुष्य सत्यपद-स्वरूप भगवान् विष्णुको प्राप्त करता है। शुभे! वहाँसे दक्षिणभागमें परम उत्तम अस्त्रतीर्थ है, जहाँ भगवान् नर और नारायण अपने अस्त्र-शस्त्र रखकर तपस्यामें संलग्न हुए थे। महाभागे! वहाँ पुण्यात्मा पुरुषोंको शङ्ख, चक्र आदि दिव्य आयुध मूर्तिमान् दिखायी देते हैं। वहाँ भक्तिपूर्वक स्नान करनेसे मनुष्यको शत्रुका भय नहीं प्राप्त होता। शुभे! वहीं मेरुतीर्थ है, जहाँ स्नान और धनुर्धर श्रीहरिका दर्शन करके मनुष्य सम्पूर्ण मनोरथोंको प्राप्त कर लेता है। जहाँ भागीरथी और अलकनन्दा मिली हैं, वह पुण्यमय (देवप्रयाग) बदरिकाश्रममें सबसे श्रेष्ठ तीर्थ है। वहाँ स्नान, देवताओं और पितरोंका तर्पण तथा भक्तिभावसे भगवत्पूजन करके मनुष्य सम्पूर्ण देवताओंद्वारा वन्दित हो विष्णुधामको प्राप्त कर लेता है। शुभानने! संगमसे दक्षिणभागमें धर्मक्षेत्र है। मैं उसे सब तीर्थोंमें परम उत्तम और पावन क्षेत्र मानता हूँ। भद्रे! वहीं 'कर्मोद्धार' नामक दूसरा तीर्थ है, जो भगवान्की भक्तिका एकमात्र साधन है। 'ब्रह्मावर्त' नामक तीर्थ ब्रह्मलोककी प्राप्तिका प्रमुख साधन है। मोहिनी! ये गङ्गाके आश्रित तीर्थ तुम्हें बताये गये हैं। बदरिकाश्रमके तीर्थोंका पूरा-पूरा वर्णन करनेमें ब्रह्माजी भी समर्थ नहीं हैं। जो मनुष्य भक्तिभावसे ब्रह्मचर्य आदि व्रतका पालन करते हुए एक मासतक यहाँ निवास करता है, वह नर-नारायण श्रीहरिका साक्षात् दर्शन पाता है।
सिद्धनाथ-चरित्रसहित कामाक्षा-माहात्म्य
मोहनी बोली— विप्रवर! मैं कामाक्षा देवीका माहात्म्य सुनना चाहती हूँ।
पुरोहित वसुने कहा— मोहिनी! कामाक्षा बड़ी उत्कृष्ट देवी हैं। वे पूर्व दिशामें रहती हैं। वे कलियुगमें मनुष्योंको सिद्धि प्रदान करनेवाली हैं। भद्रे! जो वहाँ जाकर नियमित भोजन करते हुए कामाक्षा देवीका पूजन करता है और दृढ़ आसनसे बैठकर वहाँ एक रात व्यतीत करता है, वह साधक देवीका दर्शन कर लेता है। वह देवी भयंकर रूपसे मनुष्योंके सामने प्रकट होती है। उस समय उसे देखकर जो विचलित नहीं होता, वह मनोवाञ्छित सिद्धिको पा लेता है। वरानने! वहाँ पार्वतीजीके पुत्र सिद्धनाथ रहते हैं, जो उग्र तपस्यामें स्थित हैं। लोगोंको वे कभी दर्शन नहीं