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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

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DevanagariHindipublished770 pages

Page 706 of 770

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Page 706

७०४ * संक्षिप्त नारदपुराण *


मन्त्रसे शङ्करजीकी पूजा करके उन्हें प्रणाम करे और निम्नाङ्कित मन्त्र पढ़कर उन्हें प्रसन्न करे—
त्रिलोचन नमस्तेऽस्तु नमस्ते शशिभूषण।
त्राहि मां त्वं विरूपाक्ष महादेव नमोऽस्तु ते।।
(ना० उत्तर० ५५। १९)

'तीन नेत्रोंवाले शङ्कर! आपको नमस्कार है। चन्द्रमाको भूषणरूपमें धारण करनेवाले! आपको नमस्कार है। विकट नेत्रोंवाले शिवजी! आप मेरी रक्षा कीजिये। महादेव! आपको नमस्कार है।'

इस प्रकार मार्कण्डेय-ह्रदमें स्नान करके भगवान् शङ्करका दर्शन करनेसे मनुष्य अश्वमेधयज्ञोंका फल पाता है तथा सब पापोंसे मुक्त हो भगवान् शिवके लोकमें जाता है।

तत्पश्चात् कल्पान्तस्थायी वटवृक्षके पास जाकर उसकी तीन बार परिक्रमा करे; फिर निम्नाङ्कित मन्त्रद्वारा बड़े भक्तिभावके साथ उस वटकी पूजा करे—
ॐ नमोऽव्यक्तरूपाय महते नतपालिने।
महोदकोपविष्टाय न्यग्रोधाय नमोऽस्तु ते॥
अवसस्त्वं सदा कल्पे हरेश्रायतनं वट।
न्यग्रोध हर मे पापं कल्पवृक्ष नमोऽस्तु ते॥
(ना० उत्तर० ५५। २४-२५)

'जो अव्यक्तस्वरूप, महान् एवं प्रणतजनोंका पालक है, महान् एकार्णवके जलमें जिसकी स्थिति है, उस वटवृक्षको नमस्कार है। हे वट! आप प्रत्येक कल्पमें अक्षयरूपसे निवास करते हैं। आपकी शाखापर श्रीहरिका निवास है। न्यग्रोध! मेरे पाप हर लीजिये। कल्पवृक्ष! आपको नमस्कार है।'

इसके बाद भक्तिपूर्वक परिक्रमा करके उस कल्पान्तस्थायी वटवृक्षको नमस्कार करना चाहिये। उस कल्पवृक्षकी छायामें पहुँच जानेपर मनुष्य ब्रह्महत्यासे भी मुक्त हो जाता है, फिर अन्य पापोंकी तो बात ही क्या है? ब्रह्मपुत्री! भगवान् श्रीकृष्णके अङ्गसे प्रकट हुए ब्रह्मतेजोमय वटवृक्षरूपी विष्णुको प्रणाम करके मानव राजसूय तथा अश्वमेधयज्ञसे भी अधिक फल पाता है और अपने कुलका उद्धार करके विष्णुलोकमें जाता है। भगवान् श्रीकृष्णके सामने खड़े हुए गरुड़को जो नमस्कार करता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो श्रीविष्णुके वैकुण्ठधाममें जाता है। जो वटवृक्ष और गरुड़जीका दर्शन करनेके पश्चात् पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रादेवीका दर्शन करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है। जगन्नाथ श्रीकृष्णके मन्दिरमें प्रवेश करके उनकी तीन बार परिक्रमा करे, फिर नाम-मन्त्रसे बलभद्र और सुभद्रादेवीका भक्तिपूर्वक पूजन करके निम्नाङ्कित रूपसे बलरामजीसे प्रार्थना करे—
नमस्ते हलधृग् राम नमस्ते मुसलायुध।
नमस्ते रेवतीकान्त नमस्ते भक्तवत्सल॥
नमस्ते बलिनां श्रेष्ठ नमस्ते धरणीधर।
प्रलम्बारे नमस्तेऽस्तु त्राहि मां कृष्णपूर्वज॥
(ना० उत्तर० ५५। ३३-३४)

'हल धारण करनेवाले राम! आपको नमस्कार