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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariHindipublished770 pages

Page 306 of 770

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Page 306

३०४ * संक्षिप्त नारदपुराण *

मङ्गलका मेष, बुधका कन्या, गुरुका धन, शुक्रका तुला और शनिका कुम्भ यह मूल त्रिकोण कहा गया है। चतुर्थ और अष्टमभावका नाम चतुरस्र है। नवम और पञ्चमका नाम त्रिकोण है॥१०॥ द्वादश, अष्टम और षष्ठका नाम त्रिक है; लग्न चतुर्थ, सप्तम और दशमका नाम केन्द्र है। द्विपद, जलचर, कीट और पशु—ये राशियाँ क्रमशः केन्द्रमें बली होती हैं (अर्थात् द्विपद लग्नमें, जलचर चतुर्थमें, कीट सातवेंमें और पशु दसवेंमें बलवान् माने गये हैं)॥११॥ केन्द्रके बादके स्थान (२, ५, ८, ११ ये) 'पणफर' कहे गये हैं। उसके बादके ३, ६, ९, १२—ये आपोक्लिम कहलाते हैं। मेषका स्वरूप रक्तवर्ण, वृषका श्वेत, मिथुनका शुकके समान हरित, कर्कका पाटल (गुलाबी), सिंहका धूम्र, कन्याका पाण्डु (गौर), तुलाका चितकबरा, वृश्चिकका कृष्णवर्ण, धनुका पीत, मकरका पिङ्ग, कुम्भका बभ्रु (नेवले) के सदृश और मीनका स्वच्छ वर्ण है। इस प्रकार मेषसे लेकर सब राशियोंकी कान्तिका वर्णन किया गया है। सब राशियाँ स्वामीकी दिशाकी ओर झुकी रहती हैं। सूर्याश्रित राशिसे दूसरेका नाम 'वेशि' है॥१२-१३॥

(ग्रहोंके शील, गुण आदिका निरूपण—)
सूर्यदेव कालपुरुषके आत्मा, चन्द्रमा मन, मङ्गल पराक्रम, बुध वाणी, गुरु ज्ञान एवं सुख, शुक्र काम और शनैश्चर दुःख हैं॥१४॥ सूर्य-चन्द्रमा राजा, मङ्गल सेनापति, बुध राजकुमार, बृहस्पति तथा शुक्र मन्त्री और शनैश्चर सेवक या दूत हैं, यह ज्योतिष शास्त्रके श्रेष्ठ विद्वानोंका मत है॥१५॥ सूर्यादि ग्रहोंके वर्ण इस प्रकार हैं। सूर्यका ताम्र, चन्द्रमाका शुक्ल, मङ्गलका रक्त, बुधका हरित, बृहस्पतिका पीत, शुक्रका चित्र (चितकबरा) तथा शनैश्चरका काला है। अग्नि, जल, कार्तिकेय, हरि, इन्द्र, इन्द्राणी और ब्रह्मा—ये सूर्यादि ग्रहोंके स्वामी हैं॥१६॥ सूर्य, शुक्र, मङ्गल, राहु, शनि, चन्द्रमा, बुध तथा बृहस्पति—ये क्रमशः पूर्व, अग्निकोण, दक्षिण, नैर्ऋत्यकोण, पश्चिम, वायव्यकोण, उत्तर तथा ईशानकोणके स्वामी हैं। क्षीण चन्द्रमा,

विषम राशियोंमें त्रिंशांश—

अंश५५८७५
स्वामीमङ्गलशनिगुरुबुधशुक्र

सम राशियोंमें त्रिंशांश—

अंश५७८५५
स्वामीशुक्रबुधगुरुशनिमङ्गल

१. मेषादि राशियोंके रूप-गुण आदिका बोधक चक्र

राशियाँमेषवृषमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुम्भमीन
अङ्गमें स्थानमस्तकमुखभुजहृदयपेटकमरपेडूलिङ्गऊरुजानुजङ्घापैर
अधिपतिमङ्गलशुक्रबुधचन्द्रसूर्यबुधशुक्रमङ्गलगुरुशनिशनिगुरु
बलका समयरात्रिरात्रिरात्रिरात्रिदिनदिनदिनदिनरात्रिरात्रिदिनदिन
उदयपृष्ठोदयपृष्ठोदयशीर्षोदयपृष्ठोदयशीर्षोदयशीर्षोदयशीर्षोदयशीर्षोदयपृष्ठोदयपृष्ठोदयशीर्षोदयउभयोदय
शीलक्रूरसौम्यक्रूरसौम्यक्रूरसौम्यक्रूरसौम्यक्रूरसौम्यक्रूरसौम्य
पुं-स्त्रीत्वपुरुषस्त्रीपुरुषस्त्रीपुरुषस्त्रीपुरुषस्त्रीपुरुषस्त्रीपुरुषस्त्री
स्वभावचरस्थिरद्विस्वभावचरस्थिरद्विस्वभावचरस्थिरद्विख०चरस्थिरद्विख०
दिशापूर्वदक्षिणपश्चिमउत्तरपूर्वदक्षिणपश्चिमउत्तरपूर्वदक्षिणपश्चिमउत्तर
द्विपदादिचतुष्पदचतुष्पदद्विपदजलकीटचतुष्पदद्विपदद्विपदकीट१५।१५ द्वि। च०१५।१५ च। जलद्विपदजलचर
वर्णरक्तश्वेतहरितगुलाबीधूम्रगौरचित्रकृष्णपीतपिङ्गभूरास्वच्छ
जातिक्षत्रियवैश्यशूद्रब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्रब्राह्मणक्षत्रियवैश्यशूद्रब्राह्मण