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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariHindipublished770 pages

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Page 22

२० * संक्षिप्त नारदपुराण *

समूहसे तत्काल मुक्त हो जाता है।

साधु पुरुषोंके समक्ष ही इस पुराणका वर्णन करना चाहिये; क्योंकि यह गोपनीयसे भी अत्यन्त गोपनीय है। भगवान् विष्णुके समक्ष, किसी पुण्य क्षेत्रमें तथा ब्राह्मण आदि द्विजातियोंके निकट इस पुराणकी कथा बाँचनी चाहिये। जिन्होंने काम-क्रोध आदि दोषोंको त्याग दिया है, जिनका मन भगवान् विष्णुकी भक्तिमें लगा है तथा जो सदाचारपरायण हैं, उन्हींको यह मोक्षसाधक पुराण सुनाना चाहिये। भगवान् विष्णु सर्वदेवमय हैं। वे अपना स्मरण करनेवाले भक्तोंकी समस्त पीड़ाओंका नाश कर देते हैं। श्रेष्ठ भक्तोंपर उनकी स्नेह-धारा सदा प्रवाहित होती रहती है। ब्राह्मणो! भगवान् विष्णु केवल भक्तिसे ही संतुष्ट होते हैं, दूसरे किसी उपायसे नहीं। उनके नामका बिना श्रद्धाके भी कीर्तन अथवा श्रवण कर लेनेपर मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो अविनाशी वैकुण्ठ धामको प्राप्त कर लेता है। भगवान् मधुसूदन संसाररूपी भयंकर एवं दुर्गम वनको दग्ध करनेके लिये दावानलरूप हैं। महर्षियो! भगवान् श्रीहरि अपना स्मरण करनेवाले पुरुषोंके सब पापोंका उसी क्षण नाश कर देते हैं। उनके तत्त्वका प्रकाश करनेवाले इस उत्तम पुराणका श्रवण अवश्य करना चाहिये। सुनने अथवा पाठ करनेसे भी यह पुराण सब पापोंका नाश करनेवाला है। ब्राह्मणो! जिसकी बुद्धि भक्तिपूर्वक इस पुराणके सुननेमें लग जाती है, वही कृतकृत्य है। वही सम्पूर्ण शास्त्रोंका मर्मज्ञ पण्डित है तथा उसीके द्वारा किये हुए तप और पुण्यको मैं सफल मानता हूँ; क्योंकि बिना तप और पुण्यके इस पुराणको सुननेमें प्रेम नहीं हो सकता। जो संसारका हित चाहनेवाले साधु पुरुष हैं, वे ही उत्तम कथाओंके सुननेमें प्रवृत्त होते हैं। पापपरायण दुष्ट पुरुष तो सदा दूसरोंकी निन्दा और दूसरोंके साथ कलह करनेमें ही लगे रहते हैं। द्विजवरो! जो नराधम पुराणोंमें अर्थवाद होनेकी शङ्का करते हैं, उनके किये हुए समस्त पुण्य नष्ट हो जाते हैं। विप्रवरो! मोहग्रस्त मानव दूसरे-दूसरे कार्योंके साधनमें लगे रहते हैं, परंतु पुराणश्रवणरूप पुण्यकर्मका अनुष्ठान नहीं करते हैं। श्रेष्ठ ब्राह्मणो! जो मनुष्य बिना किसी परिश्रमके यहाँ अनन्त पुण्य प्राप्त करना चाहता हो, उसको भक्तिभावसे निश्चय ही पुराणोंका श्रवण करना चाहिये। जिस पुरुषकी चित्तवृत्ति पुराण सुननेमें लग जाती है, उसके पूर्वजन्मोपार्जित समस्त पाप निस्संदेह नष्ट हो जाते हैं। जो मानव सत्सङ्ग, देवपूजा, पुराणकथा और हितकारी उपदेशमें तत्पर रहता है, वह इस देहका नाश होनेपर भगवान् विष्णुके समान तेजस्वी स्वरूप धारण करके उन्हींके परम धाममें चला जाता है। अतः विप्रवरो! आपलोग इस परम पवित्र नारदपुराणका श्रवण करें। इसके श्रवण करनेसे मनुष्यका मन भगवान् विष्णुमें संलग्न होता है और वह जन्म-मृत्यु तथा जरा आदिके बन्धनसे छूट जाता है।

आदिदेव भगवान् नारायण श्रेष्ठ, वरणीय, वरदाता तथा पुराणपुरुष हैं। उन्होंने अपने प्रभावसे सम्पूर्ण लोकोंको व्याप्त कर रखा है। वे भक्तजनोंके मनोवाञ्छित पदार्थको देनेवाले हैं। उनका स्मरण करके मनुष्य मोक्षपदको प्राप्त कर लेता है। ब्राह्मणो! जो ब्रह्मा, शिव तथा विष्णु आदि भिन्न-भिन्न रूप धारण करके इस जगत्की सृष्टि, संहार और पालन करते हैं, उन आदिदेव परम पुरुष परमेश्वरको अपने हृदयमें स्थापित करके मनुष्य मुक्ति पा लेता है। जो नाम और जाति आदिकी कल्पनाओंसे रहित हैं, सर्वश्रेष्ठ तत्त्वोंसे भी परम उत्कृष्ट हैं, परात्पर पुरुष हैं, उपनिषदोंके द्वारा