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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

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DevanagariHindipublished770 pages

Page 12 of 770

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
मोहिनीके प्रति उदार होनेका अनुरोध तथा पुत्रद्वारा माताओंका धन-वस्त्र आदिसे समादर ...................६२४१२६- मोहिनीका संध्यावलीसे उसके पुत्रका मस्तक माँगना और संध्यावलीका उसे स्वीकार करते हुए विरोचनकी कथा सुनाना .................................६४१
११८- राजाका अपने पुत्रको राज्य सौंपकर नीतिका उपदेश देना और धर्माङ्गदके सुराज्यकी स्थिति .................६२६१२७- रानी संध्यावलीका राजाको पुत्रवधके लिये उद्यत करना, राजाका मोहिनीसे अनुनय-विनय, मोहिनीका दुराग्रह तथा धर्माङ्गदका राजाको अपने वधके लिये प्रेरित करना.............................६४५
११९- धर्माङ्गदका दिग्विजय, उसका विवाह तथा उसकी शासन-व्यवस्था .............६२७१२८- राजाको पुत्रवधके लिये उद्यत देख मोहिनीका मूर्च्छित होना और पत्नी, पुत्रसहित राजा रुक्माङ्गदका भगवान्के शरीरमें प्रवेश करना ....................६४७
१२०- राजा रुक्माङ्गदका मोहिनीसे कार्तिकमासकी महिमा तथा चातुर्मास्यके नियम, व्रत एवं उद्यापन बताना .........६२९१२९- यमराजका ब्रह्माजीसे कष्ट-निवेदन, वर देनेके लिये उद्यत देवताओंको रुक्माङ्गदके पुरोहितकी फटकार तथा मोहिनीका ब्राह्मणके शापसे भस्म होना ...............६४८
१२१- राजा रुक्माङ्गदकी आज्ञासे रानी संध्यावलीका कार्तिकमासमें कृच्छ्रव्रत प्रारम्भ करना, धर्माङ्गदकी एकादशीके लिये घोषणा, मोहिनीका राजासे एकादशीको भोजन करनेका आग्रह और राजाकी अस्वीकृति ..................६३२१३०- मोहिनीकी दुर्दशा, ब्रह्माजीका राजपुरोहितके समीप जाकर उनको प्रसन्न करना, मोहिनीकी याचना ........................६५०
१२२- राजा रुक्माङ्गदद्वारा मोहिनीके आक्षेपोंका खण्डन, एकादशी-व्रतकी वैदिकता, मोहिनी-द्वारा गौतम आदि ब्राह्मणोंके समक्ष अपने पक्षकी स्थापना .............६३५१३१- मोहिनीको दशमीके अन्तभागमें स्थानकी प्राप्ति तथा उसे पुनः शरीरकी प्राप्ति .....६५३
१२३- राजाके द्वारा एकादशीके दिन भोजनविषयक मोहिनी तथा ब्राह्मणोंके वचनका खण्डन, मोहिनीका रुष्ट होकर राजाको त्यागकर जाना और धर्माङ्गदका उसे लौटाकर लाना एवं पितासे मोहिनीको दी हुई वस्तु देनेका अनुरोध करना ...........................६३७१३२- मोहिनी-वसु-संवाद—गङ्गाजीके माहात्म्यका वर्णन.......................६५५
१२४- राजा रुक्माङ्गदका एकादशीको भोजन न करनेका ही निश्चय........................६३९१३३- गङ्गाजीके दर्शन, स्मरण तथा उनके जलमें स्नान करनेका महत्त्व...............६५८
१२५- संध्यावली-मोहिनी-संवाद, रानी संध्यावलीका मोहिनीको पतिकी इच्छाके विपरीत चलनेमें दोष बताना ..............६४०१३४- कालविशेष और स्थलविशेषमें गङ्गास्नानकी महिमा ......................६६०
१३५- गङ्गाजीके तटपर किये जानेवाले स्नान, तर्पण, पूजन तथा विविध प्रकारके दानोंकी महिमा...........................६६२
१३६- एक वर्षतक गङ्गार्चन-व्रतका विधान और माहात्म्य, गङ्गातटपर नक्त-व्रत
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