मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in context६८ मुद्राराक्षस-
राक्षस ।—कुमार, ऐसा नही है, क्योंकि यहा दो प्रकार
के लोग हैं—एक चन्द्रगुप्त के साथी, दूसरे नन्दकुल के
मित्र, उन मे जो चन्द्रगुप्त के साथी हैं उन को चाणक्य
ही से दुख या कुछ नन्दकुल के मित्रों को नही, क्योकि
५ वह लोग तो यही सोचते है कि इसी कृतघ्न चन्द्रगुप्त ने
राज के लोभ से अपना पितृकुल नाश किया है, पर क्या
करें उन का कोई आश्रय नही है इस से चन्द्रगुप्त
के आसरे पडे है, जिस दिन आप को शत्रु के नाश
म और अपने पक्ष के उद्धार में समर्थ देखेंगे उसी दिन
१० चन्द्रगुप्त को छोड कर आप से मिल जायंगे, इस के
उदाहरण हमी लोग हैं ।
मलयकेतु ।- आर्य्य । चन्द्रगुप्त के हाग्ने का एक यही कारण
है कि कोई और भी है ?
राक्षस ।—और बहुत क्या होंगे एक यही बडा भारी ह ।
१५ मलयकेतु ।—क्यों आर्य्य । यही क्या प्रधान है ? क्या चन्द्र
गुप्त और मन्त्रियों से आप अपना काम करने मे असमर्थ
है ?
राक्षस ।—निरा असमर्थ है ।
मलयकेतु ।—क्यो ?
२० राक्षस ।—यों कि जो आप राज्य सम्भालते हैं या जिन का
राज राजा और मन्त्री दोनों करते हैं वह राजा ऐसे हों
तो हो, परन्तु चन्द्रगुप्त तो कदापि ऐसा नही है । चन्द्रगुप्त
एक तो दुरात्मा है दूसरे वह तो सचिव ही के भरोसे सब
काम करता है, इस से वह कुछ व्यवहार जानता ही नही
२५ तो फिर वह सब काम कैसे कर सकता है ? क्योंकि—
लक्ष्मी करत निवास अति, प्रबल सचिव नृप पाय ।
वै निज बाल-सुभाव सों, इकहि तजत अकुलाय ॥