मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in context४२ मुद्राराक्षस—
(चिट्ठी लेकर सिद्धार्थक आता है)
सि०।—जय हो महाराज की, जय हो, महाराज ! यह शकट दास के हाथ का लेख है।
चाणक्य।—(लेकर देखता है। वह कैसे सुन्दर अक्षर हैं।
५ (पढ कर) बेटा, इस पर यह मोहर कर दो।
सि०।—जो आज्ञा, (मोहर करके) महाराज, इस पर मोहर हो गई, अब और कहिये क्या आज्ञा है।
चाणक्य।—बेटा जी ! हम तुम्हे एक अपने निज के काम मे भेजा चाहते है।
१० सि०।—(हर्ष से) महाराज, यह तो आप की कृपा है, कहिये यह दास आप के कौन काम आ सकता है ?
चाणक्य।—सुनो, पहिले जहां सूली दी जाती है वहां जाकर फांसी देनेवालों को दाहिनी आंख दबाकर समझा देना* और जब वे तेरी बात समझ कर डर से इधर उधर भाग
१५ जाय तब तुम शकटदास को लेकर राक्षस मन्त्री के पास चले जाना। वह अपने मित्र के प्राण बचाने से तुम पर बडा प्रसन्न होगा और तुम्हे पारितोषिक देगा, तुम उस को लेकर कुछ दिनों तक राक्षस ही के पास रहना और जब और भी लोग पहुंच जाय तब यह काम करना
२० (कान मे समाचार कहता है)।
सि०।—जो आज्ञा महाराज।
चाणक्य।—शारंगरव ! शारंगरव !!
शिष्य।—(आकर) आज्ञा गुरुजी !
चाणक्य।—कालपाशिक और दण्डपाशिक से यह कह दो कि चन्द्रगुप्त आज्ञा करता है कि जीवसिद्धि क्षपणक ने
* चाण्डाला को पहले से समझा दिया था कि जो आदमी दाहिनो आंख दबावै उस को हमारा मनुष्य समझ कर तुम लोग चटपट हट जाना।