मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
Page 21 of 173
Read in context२६ | मुद्राराक्षस ।
नान्दी-पाठ के अनन्तर* ।
**सूत्रधार ।—**बस ! बहुत मत बढ़ाओ, सुनो, आज मुझे सभासदों की आज्ञा है कि सामन्त वटेश्वरदत्त के पौत्र और महाराज पृथु के पुत्र विशाखदत्त कवि का बनाया मुद्राराक्षस ५ नाटक खेलो । सच है, जो सभा काव्य के गुण और दोष को सब भांति समझती है, उस के सामने खेलने में मेरा भी चित्त सन्तुष्ट होता है ।
और भी
पादस्याविभ्रव तीम्भन तमवने—रक्षन् स्वैरपातै
स्सङ्कोचेनैव नेष्या मुहरभियत सर्व्वलोकातिगानाम ।
दृष्टि लङ्क्ष्वेषु नोमा ज्वलन शमुच बध्नतो दाहभीते
रित्याधारानुरोधात त्रिपुरविजयिन पातु वो दु खनृत्यम ॥२॥
अर्थ ।
'यह आप के सिर पर कौन बडभागिनी है ? 'शशिकला है । 'क्या इस का यही नाम है ? हां, यही तो तुम तो जानती हो फिर क्यो भूल गई, 'अजी हम स्त्री को पूछती हैं चन्द्रमा को नहीं पूछती 'अच्छा चन्द्र की बात का विश्वास न हो तो अपनी सखी विजया से पूछ लो । योही बात बना कर गङ्गा जी को छिपा कर देवी पार्वती को ठगने की इच्छा करने वाले महादेव जी का छल तुमलोगो की रक्षा करै ।
दूसरा ।
पृथ्वा झुकने के डर से इच्छानुसार पैर का बोझ नहीं दे सकत ऊपर के लोकों के इधर उधर हो जाने के भय से हाथ भी यथेच्छ नहीं फेंक सकते, और उस के अग्निकण से जल जायगे इसी ध्यान से किसी की ओर भर दृष्टि देख भी नहीं सकते, इस से आधार के संकोच से महादेव जी का कष्ट से नृत्य करना तुम्हारी रक्षा करै ।
* नाटको में पहले मंगलाचरण कर के तब खेल आरम्भ करते हैं । इस मंगलाचरण को नाटकशास्त्र में नान्दी कहते हैं । किसी का मत है कि नान्दी पहिले ब्राह्मण पढ़ता है, कोई कहता है सूत्रधार ही और किसी का मत है कि परदे के भीतर से नान्दी पढ़ी या गाई जाय ।