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मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)

Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)

Public domain in India · Report a copyright issue

DevanagariHindipublished173 pages

Page 159 of 173

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Page 159

१६२ मुद्राराक्षस—

चन्द्रगुप्त को पट्टरानी के गर्भ मे औरकार से उत्पन्न लिख कर
व्यर्थ अपने को भ्रम मे डाला है। चन्द्रगुप्त क्षत्रियवीर्य से दासी
मे उत्पन्न था यह सब साधारण का सिद्धान्त है। (७) इस क्रम
से ३२७ ई० पू० मे नन्द का मरण और ३१४ ई० पू० मे चन्द्र-
५ गुप्त का अभिषेक निश्चय होता है। पारसदेश की कुमारी के
गर्भ से सिल्यूकस को जो एक अति सुन्दर कन्या हुई थी वही
चन्द्रगुप्त को दी गई। ३०२ ई० पू० मे यह सन्धि और विवाह
हुआ इसी कारण अनेक यवनसेना चन्द्रगुप्त के पास रहती
थी। २६२ ई०पू० मे चन्द्रगुप्त २४ बरस राज्य कर के मरा।

१० चन्द्रगुप्त के इस मगधराज्य को आइनेअकबरी मे मकता
लिखा है। डिग्विगनेस ( Deguignes ) कहता है कि चीनी
मगध देश को मकियात कहते है। केम्फर ( Kemfer )
लिखता है कि जापानी लोग उस को मगत् कफ कहते ह ।
( कफ शब्द जापानी मे देशवाची है।) प्राचीन फारसी लेखकों
१५ ने इस देश का नाम मावाद वा मुवाद लिखा है। मगधराज्य
में अनुगाग प्रदेश मिलने ही से तिब्बतवाले इस देश को अनु
खेक वा अनोनाखेक कहते है, और तातारवाले इस देश को
एनाकाक लिखते है।

सिसली डिउडारस ने लिखा है, कि मगधराजधानी पाली
२० पुत्र भारतवर्षीय हर्क्यूलस (हरि कुल) देवता द्वारा स्थापित
हुई। सिसिरो ने हर्क्यूलस (हरिकुल) देवता का नामान्तर
बेलस (बल) लिखा है। बल शब्द बलदेव जी का बोध
करता है और इन्ही का नामान्तर बली भी है। कहते है कि
निज पुत्र अङ्गद के निमित्त बलदेव जी ने यह पुरी निर्माण की,


(७) टाट आदि कई लोगो का अनुमान है कि मेरी वश के चौहान जो बापाराव के पूर्व चित्तोर क राजा थे वे भी मौर्य थे। क्य। चन्द्रगुप्त चौहान था ? या ये मोर। सब शूद्र थ ?