मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in contextसप्तम अंक
स्थान—सूली देने का मसान
(पहिला चाडाल आता है)
**चाडाल ।—**हटो लोगो हटो, दूर हो भाइया, दूर हो । जो अपना प्राण, धन और कुल बचाना हो तो दूर हो । राजा का विरोध यत्नपूर्वक छोड़ो ।
करि कै पथ्य विरोध इक, रोगी त्यागत प्रान ।
पै बिरोध नृप सों किए, नसत सकुल नर जान ॥
जो न मानो तो इस राजा के विरोधी को देखो जो स्त्री, पुत्र समेत यहां सूली देने को लाया जाता है। ऊपर देख कर ) क्या कहा ? कि इस चन्दनदास के छूटने का कुछ उपाय भी है ? भला इस बिचारे के छूटने का कौन उपाय है ? पर हां, जो यह मंत्री राक्षस का कुटुम्ब दे दे तो छूट जाय । (फिर ऊपर देख कर ) क्या कहा कि यह शरणागतवत्सल प्राण देगा पर यह बुरा कर्म्म न करैगा ? तो फिर इसकी बुरी गति होगी क्योंकि बचने का तो वही एक उपाय है।
( कंधे पर सूली रक्खे मृत्यु का कपड़ा पहिने चन्दनदास, उसकी स्त्री और पुत्र, और दूसरा चांडाल आते हैं )
**स्त्री ।—**हाय हाय ! जो हम लोग नित्य अपनी बात बिगड़ने के डर से फूंक फूंक कर पैर रखते थे उन्हीं हम लोगों की चोरों की भांति मृत्यु होती है। काल देवता को नमस्कार है• जिस को मित्र उदासीन सभी एक से हैं, क्योंकि—