मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in context१२४ मुद्रााराक्षस -
मलयकेतु ।— दैव से पूछूँ, जीवसिद्धि क्षपणक से न पूछूँ ?
राक्षस । ( आप ही आप ) क्या जीवसिद्धि भी चाणक्य का गुप्तचर है ! हाय ! शत्रु ने हमारे हृदय पर भी अधिकार कर लिया ?
५ मलयकेतु ।—( क्रोध से ) शिखरसेन सेनापति से कहो कि राक्षस से मिल कर चन्द्रगुप्त को प्रसन्न करने को पाच राजे जो हमारा बुरा चाहते हैं उन मे कौलूत चित्रवर्मा, मलयाधिपति सिंहनाद और काश्मीराधीश पुष्कराक्ष ये तीन हमारी भूमि की कामना रखते हैं, सो इन को भूमि ही में
१० गाड दे, और सिन्धुराज सुषेण और पारसीकपति मेघनाद हमारी हाथी की सेना चाहते हैं सो इन को हाथी ही के पैर के नीचे पिसवा दो । *
पुरुष ।—जो कुमार की आज्ञा । ( जाता है )
मलयकेतु ।—राक्षस ! हम मलयकेतु हैं, कुछ तुम से विश्वा
१५ सघाती राक्षस नहीं हैं + इस से तुम जाकर अच्छी तरह चन्द्रगुप्त का आश्रय करो ।
चन्द्रगुप्त चाणक्य सों, मिलिए सुख सों आप ।
हम तीनहु को नासि हैं, जिमि त्रिवर्ग कह पाप x ॥
भागुरायण ।—कुमार ! व्यर्थ अब कालक्षेप मत कीजिए ।
२० कुसुमपुर घेरने को हमारी सेना चढ़ चुकी है ।
उड़िक तियगन गडजुगल कह मलिन बनावति ।
अलिकुल से कल अलकन निज कत ववल छुवावति ॥
* यही ब त ऐथानियन ले गो न तारा से कही थी । Wilson कहत ह कि चाणक्य की आज्ञा से ये राजे सब कैद कर लिय गए ने मारे नही गए थे ।
+ अर्थात् हम तुम्हारा प्राण नहीं मारत ।
x जैसे धर्म, अर्थ काम का पाप नाश कर दा ->