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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 98

वियोगाभिव्यक्ति ३९
१३
पिय बिन रह्योइ न जाइ।
तन मन मेरो पिया पर वॉहूँ, बार बार बलि जाइ।
निसदिन जोऊँ बाट पियाँ की, कबरे मिलोगे आइ।
मीराँ के प्रभु आस तुम्हारी, लीजो कठ लगाई। ॥४१॥
उपर्युक्त दोनो पदो की प्रथम पक्तियो का साम्य विचारणीय है।
१४
रे पपइया प्यारे कब को बैर चितार्यो१ ।
मै सूती छी अपने भवन मे, पिय पिय करत पुकार्यो।
दाध्या ऊपर लूण लगायो, हिवडो करवत सार्यो।
उठि बैठो बृच्छ की डाली, बोल बोल कठ सार्यो।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि चरणॉ चित्त धार्यो ॥४२॥
१५
तुम देख्या बिन कल न पडत है, भली ए बुरी कोइं लाख कहो जी।
नेह को पेड़ो बोहोत करुण है, च्यारी कही दस और कहो जी।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, प्रीत करो तो बोल सहोजी।
॥४३॥†
पाठान्तर १,
कृष्ण मेरे नजर के आगे ठाढो रहो रे।
मै जो बुरी सान और भली है, भली की बुरी मेरे दिल रह्यो रे।
प्रीत को पेणूडो बहुत कठिन है, चार कही दस और कहो रे।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, प्रीत करो तो मेरा बोल सहो रे।†
१ बदला लिया।