मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context३६ मीराँ-बृहद-पद-संग्रह
८
निरमोहिडा नेह न जोडे छै।
यो मन कह्यो न माने, अमृत मे बिष घोरे छै,
आप'तो जाय द्वारिका छाये, हम कूँ बिरहा झोरे१ छै।
कुबज्या दासी कंसराई की, सरब२ सुख लोरे छै।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, लागी प्रीत क्यूँ तोडे छै। ॥३६॥
९
माई, मेरा पिया बिन अलूणो३ देस।
राग रग सिणगार४ न भावै, खुलि रहे सिर के केस।
सावण आयो साहिब दूरे, जाइ रहे परदेस।
सेज५ अलूणी भवन अकेली, रैण भयकर भेस।
आव सलूणे प्रीतम प्यारे, बीते जोबन बेस६।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, तन मन करूँ सब पेस७। ॥३७॥
१०
नातो हरि नाँव को माई, मोसूँ तनक न बिसर्यो जाई।
पाना८ ज्यूँ पीली भई, लोग कहै पिड रोग।
छाने९ लांघण१० मै किया जी, राम मिलण के जोग११।
बाबल१२ बैद बुलाइया, पकडि दिखाई (म्हाँरी) बाहि।
मूरखि वेद न जानहि, (म्हाँरे) करक कलेजा माँहि।
वैद जावो घर आपणै, (म्हाँरो) नाव न लेई।
मै तो दाधी१४ हरि नांव की, मोहि काहे को दुष देई।
१ झकझोरना, २ सर्व, ३ नमक बिना, भावार्थ, रसहीन,
४ शृंगार, ५ सेज, ६ वयस, ७ समर्पण, ८ पत्ते, ६ छिपा कर,
-१० उपवास, ११ हेतु। १२ बाबुल; पिता, १३ नाम, १४ जली हुई,