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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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३१४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
१४
करना फकीरी तो क्या दिलगीरी, सदा मगन मन रहना रे।
कोई दिन बाड़ी तो कोई दिन बगला कोई दिन जंगल रहना रे।
कोई दिन हाथी कोई दिन घोडा, कोई दिन पाँखो से चलना रे।
कोई दिन गाह्दी कोई दिन तकिया, कोई दिन भोय मे पड़ना रे।
कोई दिन खाना तो कोई दिन पीना, कोई दिन भूख ही मरना रे।
कोई दिन पहनों तो कोई दिन ओढा, कोई दिन चिथरा पैरना रे।
मीराँ कहै प्रभु गिरधर नागर, ऐसा कता करना रे ॥५७०॥†
मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद
१
कित गयो पंछी बोल तो ।
कची रे मटीदा महल चुनाया, गोरवाँ ही गोरवाँ१ डोल तो ।
गुरु गोविन्द को कह्यो न मान्यो, ऐडो ही ऐडो डोल तो ।
ऐठी रेठढी पाग झुका तो, छाया निरख तो चाल तो ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, हरि चरणा चित ल्यावतो ।
॥५७१॥†
पदाभिव्यक्ति सर्वथा असंगत ही है।
२
बाल्हा, मै वैरागिण हूँगी हो ।
जो जो भेख म्हाँरो साहिब रीझै, सोइ सोइ धरूँगी हो ।
सील संतोष धरूँ घट भीतर, समता पकड रहूँगी हो ।
जाको नाम निरंजन कहि, ताको ध्यान धरूँगी हो ।
प्रेम प्रीत सूं हरि गुण गाऊँ, चरणन लिपट रहूँगी हो ।
१ बारी।