मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २८७
८
मोरे अगना मे मुरली बजाय गयो रे ।
छोटे छोटे चरण, बडे बडे नयना,
वृन्दाबन की कुज गलिन मे, मारि गयो सयना '
मेरी आली, मेरी आली कहो कित जाऊँ,
मुरली मे गावै लै लै मेरो नाम ।
ऊँची नीची घाटी, मोसे चढऊँ न जाय,
मुरली की धुनि सुनि, मोसे रहऊँ न जाय ।
कित गई गैया, कित गए ग्वाल, कित गये बसी बजावन हारा ।
घर आई गैया, घर आये ग्वाल, अजहूँ न आये मेरे मदन गोपाल ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर लाल, पाये.है दर्शन भई निहाल ।
॥५१७॥†
उपर्युक्त पद मे पूर्वापर सबध का निर्वाह नही हुआ है। पद
स० ३ और उपर्युक्त दोनो पदो मे 'मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर' न
होकर "मीराँ के प्रभु गिरिधर लाल" का ही प्रयोग हुआ है, जो
विचारणीय है ।
९
कवन गुमान भरी बसी, तू कवन गुमान भरी ।
अपने तन पै छेद परेचे, बाला तूं बिछरी ।
जाँत पाँत सब तेरो मै जाणूँ, तू बन की लकरी ।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, राधा से क्यूँ झगरी ॥५१८॥†
पद की दूसरी पक्ति का द्वितीयाश “बाला तू बिछरी” अर्थहीन
प्रतीत होता है। ऐसा ही एक पद सूरदास का भी प्राप्त है .-
बाँसुरी तू कवन गुमान भरी ।
सोने की नाही, रूपे की नाही, नाही रतन जरी ।
जात सिफत तेरी सब कोई जानै, मधुवन की लकरी ।