मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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१२
कांकरी मारे घूनारो कान, पाणीलों केम करी जई ये।
आं१ कांढे२ गगा वहाला, पेली३ कांठे जमना जी, वचमाँ गोकुलीऊं गाम।
सोना उठाणी मारूँ, रूपानु बेठँ वा'लाँ, हलवो चढावत कानो करे काम।
मारे मदरिए मारी सासु रहे छे वा'ला, सामा मदरीए मारो श्याम।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागुण, भावे भेटों४ भगवान ॥४६८॥†
१३
भूली मोतियन को हार, सखी तट जमुना किनारे।
एक एक मोती मारूँ लाख टकानु वाला, परोव्यूँ सुवरण के रे तार।
सासु हमारी अती बढकणी५ वा'ला, नन्दन बिखड़ानु६ झार।
सासु हमारो परम सुहागी, मारा छे मोहना बान।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित ध्यान ॥४६९॥†
१४
हॉरे कोइ माधवल्यो, माधवल्यो, बेचती व्रजनारी रे।
माधव ने मटुकी माँ घाली, गोपी लटके लटके चाली रे।
हॉरे गोपी घेलुं शुं७ बोलती जाय, मटुकी माँ न समाय रे।
नव मानो तो जुवो८ उतारी, माँही जुवे तो कुजबिहारी रे।
वृन्दाबन माँ जाता दहाडी वा'लो गो चार छे गिरधारी रे।
गोपी चाली वृन्दाबन वाटे, सौ व्रजनी गोपियो साथे रे।
मीराँ कहे प्रभु गिरधर नागर, जेना चरण कमल सुख सागर रे ॥४७०॥
उपर्युक्त पद से भाव साम्य रखता हुआ एक पद ब्रजभाषा मे भी
मिलता है।
१ इस, २ और, ३ उस, ४ मिलो, ५ क्रोधी, ६ विषका, ७ पागल की
तरह, ८ देख लो।